-ना चौखट ना किवाड़।खुला है सभी द्वार।
-सीट पर उगे हैं जंगल, बिखरे हैं कूड़े-कचड़ों के सामान।
-सकरी मन एपीएचसी का सार्वजनिक शौचालय क्यों है बदहाल?
दीपक कुमार तिवारी। मुजफ्फरपुर/बन्दरा।
बन्दरा प्रखंड के सकरी मन एपीएचसी की यह तस्वीर देखिए। एक तरफ जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य जन जागरूकता तथा स्वच्छता अभियान को लेकर लगातार सतर्कता बरतने एवं जनजागरूकता को लेकर कई तरह के कार्यक्रम करती रही है, दूसरी तरफ सकरी मन एपीएचसी परिसर की यह सार्वजनिक शौचालय बनने के साथ ही ऐसे दुर्दशा का शिकार हो गई। तब से इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। ना चौखट ना किवाड़।खुला है सभी द्वार। सीट पर उगे हैं जंगल, बिखरे हैं कूड़े-कचड़ों के सामान। वही शौचालय के सामने लगाए गए चापाकल भी खराब पड़े हैं।

वहीं एपीएचसी में चहारदिवारी भी नहीं है।पास में सड़क है। ऐसे में स्थानीय ग्रामीण,राहगीर एवं एपीएचसी आने वाले मरीजों,स्वास्थ्य कर्मियों तथा चिकित्सकों के लिए यह शौचालय बहू उपयोगी महत्व की है। बावजूद इसकी यह दुर्दशा कई तरह के सवाल उठाते हैं।यह जनउपयोगी से ज्यादा योजना के नाम पर खानापूर्ति लोगों के समझ में आ रहा है। इस बात को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी भी है।












