-इंतहा हो गई इंतजार की ! सीएम नीतीश की एकतरफा ‘प्रतीक्षा’,6 महीने में कई दफे जाहिर की अपनी ‘इच्छा’, फिर भी भाव देने को तैयार नहीं कांग्रेस
सम्वाददाता। पटना।
भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता का बीड़ा उठाने वाले नीतीश कुमार को सात महीने बाद भी कोई सफलता मिलते हुई नहीं दिख रही. नरेंद्र मोदी को 2024 में सत्ता से बेदखल करने को लेकर हाल के महीनों में नीतीश कुमार ने काफी पसीना बहाया. सोनिया गांधी से लेकर शरद पवार,अरविंद केजरीवाल समेत देश भर के कई नेताओं से मुलाकात की. कहीं से कोई सफलता मिलते नहीं दिखी. विपक्षी एकता की बात एक कदम आगे तो बढ़ी, फिर दो कदम पीछे चली गई. भाजपा को चक्रव्यूह में घेरने का नीतीश फ्लान अब तक विफल रहा है। सोनिया गांधी से मुलाकात में ज्यादा रिस्पांस नहीं मिलते देख सीएम नीतीश चुप हो गए. दिल्ली दौरे से तौबा कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब पटना से ही कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी नेताओं को साथ होने का आह्वान कर रहे।

वे कांग्रेस को भाजपा का भय भी दिखा रहे, इसके बाद भी सफलता मिलते नहीं दिख रही. सीएम नीतीश अपरोक्ष तौर पर कांग्रेस को कटघरे में भी खड़े कर रहे। आरोप यह कि विपक्षी एकता में कांग्रेस देरी कर रही. राहुल गांधी को सजा मिलने व लोकसभा की सदस्यता खत्म होने पर जहां संपूर्ण विपक्ष सवाल खड़े कर रहा, वहीं सीएम नीतीश इस पर बोलना उचित नहीं समझ रहे. लगे हाथ यह भी दुहरा रहे कि हम कांग्रेस के कदम का इंतजार कर रहे।
हम तो वेट कर रहे
पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्य़मंत्री नीतीश कुमार ने राहुल गांधी पर अपनी चुप्पी जरूर तोड़ी पर विपक्षी नेताओं की तरह राहुल गांधी के पक्ष में बयान नहीं दिया. उन्होंने कहा,”राहुल गांधी प्रकरण पर हमारे लिए बोलना ठीक नहीं है”. लेकिन एक बात स्पष्ट है कि विपक्षी एकता हमारी इच्छा है . नीतीश कुमार ने कहा कि तब से हम इंतजार कर रहे हैं. हम इंतजार कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग एकजुट हो जाएं और मजबूती के साथ 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ें. हम तो इसी इच्छा में चुपचाप बैठे हुए हैं. उन्होंने कहा कि आप लोग जानते हैं कि हम दिल्ली दो राउंड गए. सभी लोगों से बात की. हम अभी भी वेट कर रहे हैं. सीएम नीतीश से पूछा गया कि क्या कांग्रेस ने देरी कर दी? इस पर तुरंत जवाब देते हुए कहा कि…..हां-हां तो हम तो वेट कर रहे हैं. हम तो इंतजार ही कर रहे हैं. उनके सब लोगों को कह ही दिए हैं. हमने उनसे (कांग्रेस) से कहा है कि आप देख लीजिए, तय कर लीजिए कि अन्य लोगों से मिलकर क्या करना है. हम तो उसी के लिए वेट कर रहे हैं. कई जो क्षेत्रीय पार्टियां हैं उनमें बहुत लोगों की राय है एक साथ होने की. अगर कांग्रेस की भी इच्छा हो जाए और अधिक से अधिक लोग मिल जाएंगे तो अच्छा होगा. इसीलिए हम इंतजार में हैं. हम लोगों का दो बार मीटिंग था, अलग-अलग पार्टियों का, हम तो अभी भी इंतजार कर रहे हैं।
बता दें, एनडीए से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने ऐलान किया था कि वे 2024 में पीएम मोदी के विजय रथ को रोक देंगे। इसके लिए वे देश भर के विपक्षी नेताओं को एकजुट करेंगे। नीतीश कुमार ने इसकी शुरूआत पटना में तेलंगाना के सीएम केसीआर से मुलाकात कर की थी। केसीआर 31 अगस्त को पटना आये थे और नीतीश-तेजस्वी के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर अपने मिशन का खुलासा किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्ष की गोलबंदी को लेकर दो दफे दिल्ली दौरा कर चुके हैं. 6 सिंतंबर को सीएम नीतीश विपक्षी नेताओं से मुलाकात करने दिल्ली गए थे. 3 दिवसीय दिल्ली दौरे पर गए नीतीश कुमार ने सबसे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, कर्नाटक के पूर्व CM और JDS नेता एचडी कुमारस्वामी, CPI(M) महासचिव सीताराम येचुरी,सीपीआई के महासचिव डी राजा, दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल,NCP सुप्रीमो शरद पवार, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने कहा था कि हमें पीएम बनने की कोई इच्छा-लालसा नहीं है। हमारी कोशिश है कि विपक्षी नेताओं को एकजुट किया जाय ताकि 2024 के चुनाव में भाजपा को शिकस्त दिया जा सके।
एनडीए से अलग होने के बाद पहली दफे दिल्ली दौरे पर गए सीएम नीतीश कुमार को सोनिया गांधी से मुलाकात नहीं पाई थी। सोनिया से मुलाकात करने नीतीश कुमार दूसरी दफे 25 सितंबर को दिल्ली गए। इस दौरान वे अपने बड़े भाई लालू प्रसाद के साथ गए थे। हालांकि सोनिया गांधी से मुलाकात के दौरान कोई तस्वीर को सार्वजनिक नहीं किया गया। सोनिया गांधी के आवास से बाहर निकलने पर लालू प्रसाद और नीतीश कुमार ने हाथ उठाकर जरूर विपक्षी एकता की बात की थी।












