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स्त्री शक्ति और मां दुर्गा की आराधना: एक विस्तृत दृष्टिकोण

स्त्री शक्ति और मां दुर्गा की आराधना: एक विस्तृत दृष्टिकोण

आलेख: दीपक कुमार तिवारी।

नवरात्र का पर्व देवी दुर्गा की पूजा और स्त्री शक्ति की महिमा का प्रतीक है। इस पावन समय में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है, लेकिन साथ ही हमें यह भी समझना चाहिए कि घर की बेटी, पत्नी और मां भी स्त्री शक्ति का ही प्रतीक हैं। इनकी उपासना के बिना देवी दुर्गा की पूजा अधूरी है।

स्त्री शक्ति का महत्व:

बेटियों को अक्सर मां दुर्गा के बाल रूप का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार मां दुर्गा ने संसार को असुरों से मुक्त कराया, उसी प्रकार आज की बेटियां भी समाज के विभिन्न रूपों में योगदान देकर समाज की प्रगति का आधार बन रही हैं। हमें नवरात्रि के इस अवसर पर बेटियों, पत्नियों और माताओं को भी समान सम्मान देना चाहिए और उनकी महत्ता को पहचानना चाहिए।

समाज में स्त्री शक्ति की पहचान:

हमारे आसपास कई स्त्रियां ऐसी होती हैं, जिनकी शक्ति और योगदान को हम अनदेखा कर देते हैं। घर की बेटी हो, या पत्नी, या फिर मां—हर रूप में स्त्री शक्ति का अनूठा योगदान है। नवरात्रि के समय मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ हमें अपने घर की स्त्री शक्ति की भी पूजा करनी चाहिए। उनके प्रति करुणा, दया, प्रेम, आदर, क्षमा, और श्रद्धा का भाव जाग्रत करना न केवल सही है, बल्कि आवश्यक भी है।

 

मां दुर्गा के नौ स्वरूप और जीवन की सच्चाई:

मां दुर्गा के नौ स्वरूप—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, और सिद्धिदात्री—हमारे जीवन की विभिन्न चुनौतियों और संघर्षों का प्रतीक हैं। यह स्वरूप हमें जीवन-मरण, संसार और संस्कार, आकृति और प्रकृति के वास्तविकता से साक्षात्कार कराते हैं। इन स्वरूपों की पूजा हमें जीवन की वास्तविक सच्चाईयों को समझने और उनसे निपटने की शिक्षा देती है।

निष्कर्ष:

मां दुर्गा की आराधना तभी साकार होगी जब हम घर की स्त्रियों—बेटी, पत्नी, और मां—को भी समान आदर देंगे। स्त्री शक्ति का सम्मान और उनके प्रति सच्चे भाव न केवल नवरात्र के समय बल्कि हर दिन जाग्रत रहना चाहिए। यही सही मायनों में मां दुर्गा की पूजा और स्त्री शक्ति की वास्तविक आराधना है।