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संयोग : उम्र की आखिरी दहलीज पर जिंदगी की जंग लड़ रहे झारखंड के दो राजनीति के शेर!

-संयोग : उम्र की आखिरी दहलीज पर जिंदगी की जंग लड़ रहे झारखंड के दो राजनीति के शेर, कभी एक ही दल को सींचा था दोनों ने

धनबाद ।दिलीप।

झारखंड की राजनीति के दो बड़े दिग्गज पूर्व मंत्री द्वय समरेश सिंह एवं डाॅक्‍टर सबा अहमद जीवन की जंग लड़ रहे हैं। बोकारो के पूर्व विधायक समरेश सिंह जहां मेदांता रांची में भर्ती हैं वहीं डा. सबा अहमद फोर्टिस अस्पताल दिल्ली में भर्ती हैं।
दोनों को स्वस्थ करने में वहां के डाॅक्टर एवं पूरी टीम तथा उनके स्वजन लगे हुए हैं। समर्थक भी उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
गौरतलब है कि झारखंड की राजनीति के दोनों दिग्‍गज कभी एक साथ झारखंड विकास मोर्चा में थे। समरेश सिंह ने 2009 में झाविमो के टिकट पर बोकारो से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते तो वहीं डॉक्‍टर सबा अहमद ने दो बार गिरिडीह से झाविमो के टिकट पर चुनाव लड़ा। बाद में दोनों के रास्‍ते भी अलग हुए और राजनीतिक रूप से सक्रियता भी घटी।


झारखंड में जनसंघ से लेकर भाजपा तक को स्थापित करने वालों में समरेश सिंह की गिनती होती है। अपनी खुद की पार्टी झारखंड वनांचल कांग्रेस का भी संचालन उन्होंने काफी समय तक किया है। वह प्रसिद्ध मजदूर नेता भी हैं। धनबाद, बोकारो, गिरिडीह एवं जमशेदपुर में भी उनके समर्थक बड़ी संख्या में हैं। बोकारो विधानसभा क्षेत्र का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व करने वाले समरेश सिंह चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र में भी उतने ही लोकप्रिय रहे हैं। बाघमारा के भाजपा विधायक ढुलू महतो, चंदनकियारी के विधायक व पूर्व मंत्री अमर बाउरी समेत कई नेता जो आज राजनीति के मैदान में चमक रहे हैं, वह समरेश सिंह की ही देन है। समरेश सिंह निर्दलीय भी बोकारो विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत चुके हैं।
विधानसभा चुनाव में अपना परचम लहराने वाले समरेश सिंह धनबाद एवं गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र से कई बार चुनाव लड़े हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली है। समरेश सिंह की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बीजीएच में भर्ती कराया गया था। गंभीर हालत देख उन्हें मेदांता रेफर कर दिया गया।
दूसरी ओर डाॅक्‍टर सबा अहमद ने अपना राजनीतिक कैरियर झामुमो से शुरू किया था। उनके पिता डाॅक्‍टर आइ अहमद गिरिडीह से कांग्रेस के सांसद रह चुके थे। सबा अहमद तीन बार टुंडी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। टुंडी जैसी सीट से वह राजद के टिकट पर भी चुनाव जीत चुके हैं। संयुक्त बिहार एवं झारखंड में भी वह मंत्री रह चुके हैं। विधानसभा अध्यक्ष की भी कुर्सी वह संभाल चुके हैं।