-शिव सर्किट में शामिल हुआ बंदरा का बाबा खगेश्वरनाथ मंदिर, मेला राजकीय घोषित
मुजफ्फरपुर/बंदरा।दीपक।
मुजफ्फरपुर जिले के प्रमुख शिव मंदिरों को शिव सर्किट से जोड़कर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। बाबा गरीबनाथ मंदिर के बाद अब जिले के बंदरा प्रखंड के मतलुपुर स्थित बाबा खगेश्वरनाथ मंदिर को भी विशेष पहचान मिलने लगी है। राज्य सरकार द्वारा यहां लगने वाले मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने से मंदिर की प्रसिद्धि और श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होने की उम्मीद है।
जिले के तीन प्रमुख महादेव मंदिर—बाबा गरीबनाथ, बाबा खगेश्वरनाथ (बंदरा) और बाबा भैरवनाथ मंदिर (औराई)—को पहले ही शिव सर्किट से जोड़ा जा चुका है। इन धार्मिक स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

बंदरा प्रखंड के मतलुपुर स्थित बाबा खगेश्वरनाथ मंदिर के मेले को बिहार राज्य मेला प्राधिकार ने अपने अधीन ले लिया है। यह मंदिर रामायण काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जब भगवान राम और लक्ष्मण नागपाश में बंधे थे, तब गरुड़ को उनके नारायण स्वरूप पर संदेह हुआ था, जिसे महादेव ने दूर किया था। यहां स्थित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है और गरुड़ की विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा है।
मंदिर परिसर में हर वर्ष सावन और महाशिवरात्रि पर दो बड़े मेले आयोजित होते हैं। इन अवसरों पर उत्तर बिहार के साथ-साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। पहले इन मेलों का आयोजन स्थानीय न्यास समिति करती थी, लेकिन अब मेला प्राधिकार व्यवस्था, सुरक्षा और खर्च का जिम्मा संभालेगा।
मंदिर संचालन के लिए गठित न्यास समिति के अध्यक्ष केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति गोपालजी त्रिवेदी हैं। समिति के सदस्यों का कहना है कि मेला प्राधिकार के अधीन आने से मंदिर और आसपास के क्षेत्र का समग्र विकास होगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से बाबा खगेश्वरनाथ मंदिर की पहचान राज्य और देश स्तर पर और मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।












