–वैशाली में चैती छठ की धूम: आस्था, परंपरा और श्रद्धा का अनूठा संगम
मोहन कुमार सुधांशु। वैशाली जिले के विभिन्न गांवों में चैती छठ महापर्व को लेकर गहरी आस्था और परंपरा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। व्रतियों ने मन्नतों के साथ अपने घरों के आंगन में हाथी का पूजन किया और छठ के डाला को जागृत किया। इस दौरान परिवार के सदस्य व्रतियों की सेवा में जुटे नजर आए—कहीं कोई पैर दबाकर सेवा कर रहा था तो कहीं आशीर्वाद लेने की परंपरा निभाई जा रही थी।
क्षेत्र में चैती छठ का उल्लास चरम पर रहा।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। व्रतियों ने पूरे विधि-विधान और गहरी श्रद्धा के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। घाटों पर भक्तिमय माहौल देखने को मिला, जहां महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी पहुंचीं और परिवार के साथ पूजा-अर्चना की।

संध्या अर्घ्य के दौरान व्रतियों ने दूध और जल से भगवान भास्कर की उपासना की तथा छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि और संतानों की लंबी आयु की कामना की। बांस की टोकरी में फल, फूल, ठेकुआ, चावल के लड्डू, गन्ना, मूली और कंदमूल जैसे पारंपरिक प्रसाद सजाकर अर्पित किए गए।
घाटों पर “छठी मैया” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा, जिससे श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह महापर्व प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति अटूट विश्वास और आस्था का प्रतीक है, जिसमें लोग पूरी निष्ठा के साथ शामिल होकर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।












