-वर्दी में रील्स पर हंगामा बेबुनियाद! पुलिस मुख्यालय ने कहा—नया फरमान नहीं, पुराने नियम ही सख्त
-सोशल मीडिया पर वायरल ‘कड़क आदेश’ की खबर निकली भ्रामक, वर्दी की गरिमा से समझौते पर पहले से ही सख्ती
पुलिस महकमे में वर्दी पहनकर रील्स बनाने को लेकर इन दिनों मचे हंगामे पर पुलिस मुख्यालय ने स्थिति साफ कर दी है। मुख्यालय ने सोशल मीडिया पर चल रही सख्ती वाली खबरों को पूरी तरह भ्रामक बताते हुए कहा है कि ऐसा कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है।
दरअसल, हाल के दिनों में कई पुलिसकर्मी वर्दी में रील्स और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते नजर आए थे। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने सॉफ्ट वार्निंग देते हुए कर्मियों को सिर्फ इतना निर्देश दिया था कि वे पुलिस मैनुअल और निर्धारित एसओपी के अनुसार ही आचरण करें। लेकिन इस सामान्य निर्देश को सोशल मीडिया पर नए ‘कड़े फरमान’ के रूप में पेश कर दिया गया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
मुख्यालय के अनुसार 20 अप्रैल को जारी निर्देश कोई नया नियम नहीं था, बल्कि पहले से लागू नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए था। सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) की गाइडलाइंस का ही हवाला दिया गया था।

असल में, बिहार पुलिस हस्तक 1978 के नियम-1061 में वर्दी की गरिमा और आचरण को लेकर स्पष्ट प्रावधान पहले से मौजूद हैं। इन नियमों के तहत वर्दी के साथ अनावश्यक आभूषण, जातीय चिन्ह या अजीबोगरीब स्टाइल पर रोक है। ड्यूटी के दौरान पान-गुटखा, धूम्रपान या आधी वर्दी-आधा सिविल लुक भी प्रतिबंधित है।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर नई पाबंदी की जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह गुमराह करने वाली हैं। हकीकत यही है कि नियम पहले से लागू हैं और अब उन्हें सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया जा रहा है।
ऐसे में साफ है कि रील्स बनाना खुद में समस्या नहीं, बल्कि वर्दी की गरिमा से खिलवाड़ करना असली मुद्दा है—और इस पर पुलिस महकमा अब किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।











