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बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश: क्या रघुवर दास बन सकते हैं डार्क हॉर्स?

-बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश: क्या रघुवर दास बन सकते हैं डार्क हॉर्स?

नई दिल्ली/रांची | दीपक कुमार तिवारी

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश तेज हो गई है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, और अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक नए अध्यक्ष का चयन करना है। दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी में नए अध्यक्ष को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

क्या दक्षिण भारत से मिलेगा नया अध्यक्ष?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार बीजेपी अध्यक्ष दक्षिण भारत से हो सकता है। पार्टी नेतृत्व लंबे समय से दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, और इसी रणनीति के तहत अध्यक्ष पद के लिए जी किशन रेड्डी, बंडी संजय कुमार और प्रह्लाद जोशी के नाम चर्चा में हैं।

हालांकि, बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अपने फैसलों से अक्सर चौंकाने वाले निर्णय लेता रहा है। चाहे राज्यों में मुख्यमंत्री की नियुक्ति हो या केंद्र सरकार में मंत्रियों का चयन, पार्टी ने कई बार उम्मीदों के विपरीत फैसले लिए हैं। ऐसे में, क्या झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास एक डार्क हॉर्स साबित हो सकते हैं?

रघुवर दास की दावेदारी क्यों मजबूत?

हाल ही में ओडिशा के राज्यपाल पद से हटाए गए रघुवर दास ने दोबारा बीजेपी की सक्रिय राजनीति में वापसी कर ली है। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप सकती है।

रघुवर दास का राजनीतिक अनुभव बेहद समृद्ध है—वे झारखंड में प्रदेश अध्यक्ष, मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। उन्हें गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है, जो उनकी दावेदारी को और मजबूत करता है।

बिहार-पश्चिम बंगाल में उपयोगी हो सकते हैं रघुवर दास:

बीजेपी के लिए बिहार और पश्चिम बंगाल दो महत्वपूर्ण राज्य हैं, जहां पार्टी को मजबूत रणनीति की जरूरत है। बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं, और झारखंड उसका पड़ोसी राज्य है। रघुवर दास को बिहार की राजनीति की गहरी समझ है और वह पश्चिम बंगाल में भी पार्टी को मजबूती देने में योगदान दे सकते हैं।

बीजेपी नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा:

रघुवर दास को बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का भरोसेमंद नेता माना जाता है। 2014 में झारखंड विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, जबकि आम धारणा थी कि कोई आदिवासी नेता मुख्यमंत्री बनेगा। हालांकि, 2019 के चुनाव में रघुवर दास खुद अपनी सीट हार गए और बीजेपी भी सत्ता से बाहर हो गई। इसके बावजूद, पार्टी ने उन्हें ओडिशा का राज्यपाल बनाकर उनकी अहमियत बरकरार रखी।

क्या बीजेपी फिर कर सकती है चौंकाने वाला फैसला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए दक्षिण भारत के तीन नेताओं के नाम चर्चा में हैं। लेकिन यह भी संभव है कि पार्टी फिर से एक अप्रत्याशित फैसले के तहत रघुवर दास पर भरोसा जता सकती है।

बीजेपी के नए अध्यक्ष के रूप में कौन चुना जाएगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन रघुवर दास की संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके राजनीतिक अनुभव, पार्टी नेतृत्व के साथ करीबी रिश्ते और संगठन पर पकड़ को देखते हुए वे बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकते हैं।