-बिहार में 75 हजार से अधिक सरकारी पद खाली, एक करोड़ अभ्यर्थियों का इंतजार बढ़ा; कई बड़ी भर्तियां वर्षों से अटकी
पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। राज्य की कई प्रमुख भर्ती प्रक्रियाएं वर्षों से लंबित हैं, जिसके कारण 75 हजार से अधिक रिक्त पद अब तक नहीं भरे जा सके हैं। स्थिति यह है कि करीब एक करोड़ अभ्यर्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तिथि घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं। कहीं आवेदन लेने के बाद भी परीक्षा नहीं हो रही है तो कहीं रिक्तियां तय होने के बावजूद विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। इससे युवाओं में निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
सबसे अधिक चर्चा बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) और बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की लंबित भर्तियों को लेकर है। शिक्षा विभाग से स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलने के कारण शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 पिछले दो वर्षों से अटकी हुई है। बीपीएससी को 46,980 रिक्तियां मिल चुकी हैं, लेकिन अब तक भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं हो सका है। परीक्षा एक चरण में होगी या दो चरणों में, इस पर भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
वहीं बीएसएससी की द्वितीय इंटर स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा भी लंबे समय से लंबित है। सितंबर 2023 में आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में कई बार बदलाव किए गए, आवेदन संशोधन की तिथि बढ़ाई गई और रिक्तियों की संख्या भी लगातार बढ़ती रही। शुरुआती 11,096 पद अब बढ़कर 26,426 हो चुके हैं, लेकिन प्रारंभिक परीक्षा की तिथि अब तक घोषित नहीं की गई है। इस भर्ती के लिए लगभग 36 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है।

चतुर्थ स्नातक स्तरीय सीजीएल भर्ती भी करीब एक वर्ष से आगे नहीं बढ़ सकी है। अगस्त 2025 में 1,064 पदों के लिए जारी विज्ञापन में अब रिक्तियों की संख्या बढ़कर 1,883 हो गई है। इस भर्ती से करीब 10 लाख अभ्यर्थी जुड़े हुए हैं। इसके अलावा प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी के 682 पदों के लिए मार्च 2025 में आवेदन लिए गए थे, लेकिन लगभग चार लाख अभ्यर्थी आज भी परीक्षा तिथि की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
बीपीएससी के प्रभारी सचिव सह परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार के अनुसार, टीआरई-4 भर्ती को लेकर शिक्षा विभाग से अभी तक स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। रिक्तियां उपलब्ध हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा की रूपरेखा पर अंतिम निर्णय विभाग के निर्देश मिलने के बाद ही लिया जाएगा।
उधर, प्रतियोगी छात्र लगातार बढ़ती उम्र, महंगाई और अनिश्चितता से परेशान हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों से भर्ती परीक्षाओं का इंतजार करते-करते उनकी आयु सीमा प्रभावित हो रही है। पटना समेत अन्य शहरों में कोचिंग, किराया और रहने का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही। अब लाखों युवाओं की निगाह सरकार और संबंधित आयोगों पर टिकी है कि लंबित परीक्षाओं का कार्यक्रम कब घोषित होगा और खाली पड़े हजारों पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया कब शुरू होगी।












