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बिक्रम में विवादों से घिरे डॉक्टर पर राजेंद्रनगर में भी अभद्रता का आरोप, फार्मासिस्ट ने सीएस से की शिकायत

-बिक्रम में विवादों से घिरे डॉक्टर पर राजेंद्रनगर में भी अभद्रता का आरोप, फार्मासिस्ट ने सीएस से की शिकायत

पटना। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों के आचरण और पदस्थापन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बिक्रम में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी रहते हुए गंभीर आरोपों से घिरे रहे डॉ. जयबोध कुमार के खिलाफ अब राजेंद्रनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी कथित अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और धमकी का मामला सामने आया है। एक फार्मासिस्ट ने इस संबंध में सिविल सर्जन को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बताया गया है कि 4 सितंबर 2026 को करीब 11:30 बजे दवा वितरण कक्ष में कथित तौर पर फार्मासिस्ट के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विरोध करने पर उसे धमकी भी दी गई। शिकायत में मारपीट का भी आरोप लगाया गया है।

डॉ. जयबोध कुमार इससे पहले बिक्रम में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी रहते हुए भी विवादों में रहे थे। उपलब्ध जांच प्रतिवेदन में उनके खिलाफ अनियमित एवं अमर्यादित कार्यकलाप से संबंधित कई शिकायतों का उल्लेख किया गया था। जांच रिपोर्ट में थाना कांड संख्या 449/2023, दिनांक 3 नवंबर 2023 का भी जिक्र है और जांच के दौरान आरोपों को सत्य पाए जाने की बात दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इस मामले में अभियोजन स्वीकृत्यादेश के लिए पुलिस स्तर से पत्राचार किए जाने का भी उल्लेख बताया गया है।

जांच प्रतिवेदन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों की ओर से की गई शिकायतों का भी उल्लेख किया गया था। जांच के बाद डॉ. जयबोध कुमार को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के पद से मुक्त कर किसी अन्य प्रखंड अथवा जिला स्तर के स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित करने की अनुशंसा की गई थी।

इसके बावजूद 16 अप्रैल 2025 के आदेश से उन्हें दोबारा पीएचसी बिक्रम का प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी नियुक्त किया गया। इसके बाद उनका पदस्थापन राजेंद्रनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किया गया। अब यहां से सामने आई नई शिकायत के बाद एक बार फिर उनके कार्य व्यवहार और पदस्थापन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग में यह चर्चा भी है कि गंभीर शिकायतों के बाद केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादला करना पर्याप्त है या नहीं। वहीं, प्रभाव या पैरवी के आधार पर तबादला अथवा पदस्थापन कराने के आरोप भी चर्चा में हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इसकी भी विभागीय स्तर पर जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।

राजेंद्रनगर में सामने आई शिकायत के बाद अब सवाल उठ रहा है कि बिक्रम में जिन व्यवहार संबंधी शिकायतों की जांच हुई थी, क्या उसी तरह की स्थिति यहां भी सामने आ रही है। यदि वर्तमान शिकायत जांच में सही पाई जाती है तो विभाग के लिए चिकित्सक के पूर्व सेवा रिकॉर्ड, पुरानी जांच रिपोर्ट और वर्तमान आरोपों की समग्र समीक्षा करना महत्वपूर्ण होगा।

मामले में पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा कि घटना की जानकारी उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने बताया कि जिस फार्मासिस्ट के साथ मारपीट या किसी अन्य के साथ अभद्रता की बात कही जा रही है, उसकी ओर से अभी तक लिखित शिकायत नहीं दी गई है। लिखित शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।