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नीतीश कुमार बने राज्यसभा सदस्य, बिहार की सियासत में नई बिसात; 14 अप्रैल पर टिकी नजरें

-नीतीश कुमार बने राज्यसभा सदस्य, बिहार की सियासत में नई बिसात; 14 अप्रैल पर टिकी नजरें

पटना/नई दिल्ली।ब्यूरो। बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर अपनी सियासी पारी को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने एक सादगीपूर्ण लेकिन अहम समारोह में उन्हें शपथ दिलाई। इसे सियासत में एक बड़ी रणनीतिक चाल के तौर पर देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार अब उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने चारों सदनों का सफर तय किया है। इससे पहले लालू प्रसाद यादव यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। सियासी गलियारों में इसे अनुभव का ‘ताज’ माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण समारोह में ललन सिंह, जेपी नड्डा, निर्मला सीतारमण और अर्जुन राम मेघवाल सहित कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी रही। वहीं संजय झा, राजीव शुक्ला, जयराम रमेश और राजीव प्रताप रूड़ी जैसे वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने इस मौके को और भी राजनीतिक रूप से अहम बना दिया।
राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करते ही नीतीश कुमार का बिहार के मुख्यमंत्री पद से औपचारिक नाता समाप्त हो गया है। अब सबकी नजरें 14 अप्रैल पर टिकी हैं, जब एनडीए नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर सकता है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि यह बदलाव सिर्फ पद परिवर्तन नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।


सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति में सीमित भूमिका निभाते हुए बिहार में संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देंगे। माना जा रहा है कि वे अब सक्रिय सत्ता से हटकर एक मार्गदर्शक और सलाहकार की भूमिका में नजर आएंगे, जहां उनका अनुभव पार्टी और सरकार दोनों के लिए उपयोगी साबित होगा।
इस बीच नरेंद्र मोदी ने भी उनकी सराहना करते हुए उन्हें अनुभवी और सुशासन के प्रति समर्पित नेता बताया। साफ है कि नीतीश कुमार का यह कदम बिहार और देश की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत का संकेत दे रहा है—जहां पद बदल सकता है, लेकिन प्रभाव कायम रहेगा।