-सुधाकर ने नीतीश के साथ-साथ RJD नेतृत्व की भी खोल दी पोल
सम्वाददाता। पटना।
राजद विधायक सुधाकर सिंह ने नोटिस का जवाब दे दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्धीकी को भेजे पांच पन्नों के जवाब में सुधाकर सिंह ने पोल खोलकर रख दिया. साथ ही राजद नेतृत्व को भी सीधे-सीधे कटघरे में खड़ा किया है। राजद विधायक ने अपने जवाब में लिखा है कि हमें नोटिस देकर राजद की ए-टू-जेड नीति की पुष्टि नहीं हो रही.
सुधाकर सिंह ने 30 तारीख को भेजे अपने जवाब में कहा है कि भेजे गए नोटिस में अस बात का उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संदर्भ में मेरे द्वारा की गई टिप्पणी से राजद के राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव का उल्लंघन हुआ है. हालांकि मेरे किस बयान से इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया नोटिस में इसका जिक्र नहीं है. यह बात न सिर्फ त्रुटिपूर्ण है बल्कि निराधार भी है. साथ ही प्रथम दृष्टया तार्किक प्रतीत नहीं होता है. नीतीश कुमार जेडीयू के नेता हैं .राजद के राष्ट्रीय अधिवेशन में किसी अन्य राजनीतिक दल या उसके सदस्य से संबंधित ना कोई चर्चा हुई और ना ही कोई प्रस्ताव पारित हुआ था. राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में राजद के किसी भी कार्यकर्ता को अन्य दल के कार्यकर्ताओं पर टिप्पणी करने के लिए न तो मना किया गया और ना ही रोक लगाई गई थी. ऐसे में स्पष्ट होता है कि जेडीयू नेता नीतीश कुमार से संबंधित मेरे किसी बयान से राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव की अवहेलना नहीं हुई. हमने नीतिगत मामलों पर सवाल उठाए थे. इसको विस्तार से समझा जाएगा तो स्पष्ट मालूम होगा।

सुधाकर सिंह आगे लिखते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2006 में मंडी कानून खत्म करने का बिल बिहार विधानसभा में लाया था. तब राजद के विधायकों ने विधानसभा में प्रतिरोध दर्ज किया था. जब बिहार विधानसभा के भीतर बात नहीं सुनी गई तो सदन से वाकआउट किया गया था. जैसे हाल फिलहाल में पुलिस कानून के खिलाफ राजद विधायकों ने विधानसभा के भीतर प्रतिरोध किया था. दोनों मामलों में बस अंतर इतना था कि 2006 के मंडी कानून समाप्त करने का समय विधायकों की पिटाई नहीं हुई थी. वहीं पुलिस कानून का विरोध करने पर सदन के भीतर एवं बाहर विधायकों को पुलिस द्वारा जबरदस्त पिटाई की गईथी. यहां तक कि महिला विधायकों को घसीट कर पीटा गया था. महागठबंधन में रहते हुए भी हाल में नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव की उपस्थिति में सार्वजनिक मंच से यह कहा कि 2005 से पहले कुछ था क्या …? जो विकास हुआ है वह 2005 के बाद हुआ है. उनका यह बार-बार कहना राजद के द्वारा किए गए विकास को नकारना है. साथ ही राजद कार्यकर्ताओं के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाली है.
2022 में नई राजनीतिक परिस्थिति में नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनी .नेतृत्व द्वारा मेरी अनिच्छा के बावजूद मुझे कृषि मंत्री बनाने का फैसला इस आश्वासन के साथ लिया कि घोषित नीतियों पर कार्य करने के अवसर मिलेंगे. लेकिन विभाग में व्याप्त विसंगतियों एवं मंडी कानून पर बढ़ने की मेरी मंशा पर अधिकारियों द्वारा अवरोध पैदा किया जाता रहा. जिसकी चर्चा हमने कैबिनेट की मीटिंग में की. साथ ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बताया. 2 अक्टूबर को कृषि मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद दिल्ली में 8 एवं 9 अक्टूबर को राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के आर्थिक प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से मंडी कानून लागू करने एवं धान गेहूं की खरीद में मल्टीपल एजेंसी करने की वचनबद्धता प्रकट की गई. इन बिंदुओं पर जब संवाददाताओं ने सवाल पूछे तो हमने इन्हीं मुद्दों पर अपने आप को केंद्रित रखा. जिसके उत्तर में सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ताओं-नेताओं एवं मंत्रियों ने मेरे ऊपर व्यक्तिगत एवं चारित्रिक हमले किए. मुझे लगा कि कृषि के मुद्दे पर सार्थक बहस के लिए सरकार तैयार हो जाएगी या मुद्दे पर मौन साध लेगी.
सुधाकर सिंह ने राजद नेतृत्व को आईना दिखाते हुए, साथ ही अफसोस जताते हुए लिखा कि ऐसी परिस्थिति में मुझे पार्टी के नेताओं से अपेक्षा थी कि नीतियों-सिद्धांतों पर आधारित मेरे बयानों का बचाव किया जाएगा. लेकिन अफसोस के साथ यहां कहना पड़ रहा है कि किस राजनीतिक दबाव में मेरा बचाव नहीं किया गया ? जबकि मुझे पार्टी की तरफ से कम से कम नैतिक समर्थन की जरूरत तो थी ही. उल्टे मेरे विचारों एवं सिद्धांत पर पार्टी का समर्थन नहीं मिलना मुझे चिंतित अवश्य कर रहा है. लेकिन भविष्य के लिए विचलित नहीं कर रहा.
मुझे आशा है कि भविष्य में राजद अपने उद्देश्य-सिद्धांतों पर पार्टी के भीतर व्यापक विचार विमर्श के जरिए वर्तमान सरकार के मुखिया के सामने अपना पक्ष मजबूती से जरूर रखेगा. अगर दूसरे राजनीतिक दल के किसी नेता पर मेरे द्वारा की गई किसी टिप्पणी से किसी तरह की असहमति थी तो मुझे निजी तौर पर या आधिकारिक तौर पर सूचित किया जा सकता था. इस पत्र से पहले मुझे कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली. मुझे अकेले चिन्हित करके नोटिस भेजना न्याय संगत प्रतीत नहीं होता है. न ही यह हमारी पार्टी के ए टू जेड की नीति की पुष्टि करता है. अंत में सुधाकर सिंह ने लिखा है कि मैं पूरी मजबूती और दृढ़ संकल्प के साथ यह लड़ाई जीवन पर्यंत लड़ता रहूंगा.












