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गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन प्रशिक्षण अंतिम चरण में

-गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन प्रशिक्षण अंतिम चरण में

-प्रशिक्षुओं ने सीखी आधुनिक तकनीकें

ढोली/मुजफ्फरपुर, 30 मई। बिहार कौशल विकास मिशन एवं बिहार कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (बामेती), पटना के निर्देशानुसार बीज निदेशालय, ढोली में संचालित गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादक प्रशिक्षण कार्यक्रम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। 30 मार्च 2026 से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 5 जून 2026 तक चलेगा। 390 घंटे के इस विशेष प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को बीज उत्पादन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और बेगूसराय जिलों के 30 प्रशिक्षु नियमित रूप से भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के प्राध्यापक डॉ. राजेश कुमार तथा पादप रोग विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. हेम चंद्र चौधरी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने में विश्वविद्यालय के प्रशिक्षुओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, फसल स्वास्थ्य प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों से संबंधित तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों और ग्रामीण युवाओं को वैज्ञानिक बीज उत्पादन पद्धतियों से परिचित कराना तथा कृषि क्षेत्र में उनकी तकनीकी दक्षता को मजबूत बनाना है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बीज उत्पादन, बीज शोधन, भंडारण, फसल प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, बीज प्रमाणीकरण तथा कृषि में उपयोग की जा रही नवीनतम तकनीकों की जानकारी दी गई। व्यावहारिक अनुभव के लिए प्रशिक्षुओं को खेतों, अनुसंधान इकाइयों और प्रदर्शन प्लॉटों का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्होंने बीज उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं को नजदीक से समझा।

फील्ड विजिट के दौरान फसल की आनुवंशिक शुद्धता बनाए रखने, रोगों की पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया। बीज निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि समूह चर्चा, प्रश्नोत्तर सत्र, प्रदर्शन आधारित प्रशिक्षण और फील्ड विजिट के माध्यम से इसे पूरी तरह व्यवहारिक स्वरूप दिया गया है।

प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रतिभागियों ने बताया कि इस कार्यक्रम से उन्हें आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की नई जानकारियां मिली हैं। कई प्रशिक्षुओं ने कहा कि पहले उन्हें बीज उत्पादन के संबंध में सीमित जानकारी थी, लेकिन अब वे गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने, उसकी शुद्धता बनाए रखने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने की वैज्ञानिक विधियों को समझ चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे अपने गांवों के अन्य किसानों के साथ भी यह ज्ञान साझा करेंगे।

बीज निदेशालय, ढोली के निदेशक डॉ. डी.के. राय ने बताया कि प्रशिक्षण के शेष दिनों में बीज गुणवत्ता परीक्षण, बीज विपणन, कृषि उद्यमिता तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रशिक्षण समाप्त होने पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया जाएगा और सफल प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

सहायक प्राध्यापक डॉ. विनय कुमार चौधरी ने कहा कि इस प्रकार के कौशल विकास आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों एवं ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में भी ऐसे कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी साबित हो रहे हैं।