-बिहार में सियासी हलचल तेज: सम्राट चौधरी के कैबिनेट विस्तार से बदलेगा सत्ता का पूरा समीकरण
पटना:बिहार की राजनीति इन दिनों उबाल पर है और हर तरफ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा जोरों पर है। सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की सियासत एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहाँ पुराने समीकरण टूटते नजर आ रहे हैं और नए गठजोड़ की जमीन तैयार हो रही है। फिलहाल सरकार एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों के सहारे चल रही है, लेकिन कैबिनेट विस्तार की तैयारियों ने राजनीतिक सरगर्मी को तेज कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, 5 मई 2026 के बाद, जब पश्चिम बंगाल और असम के चुनावी नतीजे साफ हो जाएंगे, उसके बाद बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार का ऐलान हो सकता है। इस बार फॉर्मूला “नया चेहरा” पर आधारित बताया जा रहा है। चर्चा है कि 30 से 40 फीसदी तक नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 70 फीसदी पुराने चेहरों को बरकरार रखते हुए 30 फीसदी नए चेहरों की एंट्री हो सकती है।

जनता दल (यूनाइटेड) खेमे में भी हलचल तेज है, जहाँ करीब 30 फीसदी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी अपने कोटे में 40 फीसदी नए चेहरों को शामिल कर नई टीम बनाने की तैयारी में है।
सहयोगी दलों की बात करें तो चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों को भी सरकार में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। खास बात यह है कि मांझी के बेटे संतोष सुमन और दीपक प्रकाश के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी केवल चेहरों में बदलाव नहीं, बल्कि विभागों में भी बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में हैं। उनका लक्ष्य एक मजबूत “कोर टीम” बनाना है, जो उनके विकास विजन को प्रभावी तरीके से लागू कर सके।
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि यह सिर्फ कैबिनेट विस्तार नहीं, बल्कि नई सत्ता संरचना का ब्लूप्रिंट है। इसमें एक तरफ पुराने दौर की विदाई होगी, तो दूसरी ओर नए राजनीतिक युग की शुरुआत भी देखने को मिल सकती है।












