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अहिंसा का पुजारी भी अंततः हिंसा का शिकार हुआ : प्रो कैलाश

-अहिंसा का पुजारी भी अंततः हिंसा का शिकार हुआ : प्रो कैलाश

– एमजीसीयू में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं ब्रजकिशोर सिंह वार्षिक पुरस्कार समारोह संपन्न

मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

महात्मा बुद्ध परिसर, बनकट स्थित वृहस्पति सभागार में महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह गांधीवादी चिंतक ब्रजकिशोर सिंह वार्षिक पुरस्कार समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव एवं मुख्य अतिथि प्रो. कैलाश सोदानी ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम शुभारंभ विश्वविद्यालय के छात्र मनोज ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन से की। “वर्तमान समय में गांधीवादी चिंतन की प्रासंगिकता और साहित्य” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी के संयोजक मानविकी एवं भाषा संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजेंद्र बडगूजर थे। कार्यक्रम का आयोजन मानविकी एवं भाषा संकाय तथा ब्रजकिशोर सिंह वार्षिक पुरस्कार समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री, भारत सरकार प्रो. संजय पासवान तथा गांधी संग्रहालय स्मारक समिति, मोतिहारी के सचिव विनय कुमार सिंह उपस्थित रहे। स्वागत वक्तव्य में प्रो. बडगूजर ने सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए संगोष्ठी के महत्व पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि प्रो. कैलाश सोडाणी ने अपने विचारों में इतिहास, वर्तमान और नैतिक मूल्यों को जोड़ते हुए एक प्रभावशाली संदेश दिया। उन्होंने महाभारत युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा, “ अहिंसा का पुजारी भी अंततः हिंसा का शिकार हुआ,” जो आज के समय की विडंबना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सत्य और स्वच्छता के साथ जीवन जीना चाहिए, क्योंकि यही गांधीवादी विचारधारा की मूल आत्मा है।


कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने बताया कि ब्रजकिशोर सिंह वार्षिक पुरस्कार समारोह का आयोजन एमजीसीयू परिसर में विशेष प्रयासों के बाद संभव हो पाया। उन्होंने सभी पुरस्कृत लेखकों को शुभकामनाएं दीं तथा उनकी गरिमामयी उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय गांधीजी के विचारों को संरक्षित और प्रसारित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
गांधी संग्रहालय स्मारक समिति, मोतिहारी के सचिव विनय कुमार सिंह ने ब्रजकिशोर सिंह वार्षिक पुरस्कार की स्थापना की पृष्ठभूमि बताते हुए गांधीजी के विचारों की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चंपारण भारत की पहचान है। गांधीजी का उल्लेख चंपारण के बिना अधूरा है। समारोह में वर्ष 2022, 2023 और 2024 के लिए ब्रजकिशोर सिंह वार्षिक पुरस्कार प्रदान किए गए। वर्ष 2022 का पुरस्कार भैरव लाल दास को उनकी पुस्तक ‘राजकुमार शुक्ल’ पर आधारित कृति के लिए दिया गया। वर्ष 2023 के लिए प्रो. गिरीश्वर मिश्र को ‘मंगल प्रभात की प्रतीक्षा’ तथा वर्ष 2024 के लिए प्रो. बी.एम. शर्मा को ‘सत्याग्रह की पाठशाला’ पुस्तक के लिए सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी। लेकिन विगत वर्षों में आयोजन नहीं हो पाने के कारण इन वर्षों के पुरस्कार इस मंच से प्रदान किए गए।
भैरव लाल दास ने गांधीजी के विचारों को दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया और चंपारण को क्रांति व शांति की भूमि बताया। वहीं प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने गांधीजी की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की। प्रो. बी.एम. शर्मा ने गांधीजी के आश्रमों और उनके विचारों को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि गांवों के विकास के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रो. सुनील महावर ने मंच से सभी अतिथियों एवं विद्वान गणों का हार्दिक आभार व्यक्त किया।कहा कि अनेक चुनौतियों और बाधाओं के बावजूद कुलपति जी के मार्गदर्शन एवं सहयोग से ही यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। साथ ही, ब्रजकिशोर सिंह पुरस्कार समिति के सभी सदस्यों के प्रति भी उन्होंने कृतज्ञता प्रकट की, जिनके अथक प्रयासों से आयोजन को सफल बनाया जा सका। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।