-लोकसभा सीटों में बड़ा इज़ाफ़ा संभव, 2029 से बदल सकती है देश की सियासी तस्वीर
-543 से बढ़कर 816 सीटों पर मंथन, महिला आरक्षण के साथ नए परिसीमन की तैयारी
नई दिल्ली।ब्यूरो।
देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि भारत सरकार की अगुवाई वाली मोदी सरकार लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह कदम सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि देश की चुनावी और राजनीतिक संरचना को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा खाका नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़ा हुआ है। प्रस्तावित योजना के तहत 816 सदस्यीय लोकसभा में करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं, जिससे संसद में महिलाओं की भागीदारी को ऐतिहासिक बढ़ावा मिलेगा।
अगर राज्यों की बात करें, तो बिहार में मौजूदा 40 लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 60 या उससे अधिक हो सकती है। इनमें लगभग 20 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होने की संभावना है। वहीं झारखंड में 14 सीटों के मुकाबले 21 सीटें होने का अनुमान जताया जा रहा है, जिनमें 5 सीटें महिलाओं को मिल सकती हैं।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा भी बदल जाएगा। वर्तमान में 272 का जादुई आंकड़ा बढ़कर 409 हो सकता है, जिससे सभी राजनीतिक दलों को नई रणनीति बनानी होगी। इससे गठबंधन की राजनीति और चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि यह प्रस्तावित बदलाव 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू किया जा सकता है। सरकार इसी सप्ताह महिला आरक्षण कानून में संशोधन के साथ-साथ 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के लिए संविधान संशोधन बिल भी पेश कर सकती है।
देश में अब तक परिसीमन की प्रक्रिया 1951, 1961 और 1971 में ही हुई है। 42वां संविधान संशोधन के बाद सीटों के पुनर्निर्धारण पर रोक लगा दी गई थी। अब दशकों बाद एक बार फिर यह मुद्दा केंद्र में है और नए सिरे से देश का सियासी नक्शा खींचने की तैयारी चल रही है।
कुल मिलाकर, यह सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं, बल्कि आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय करने वाला बड़ा कदम साबित हो सकता है, जिसमें ‘नारी शक्ति’ को केंद्र में रखकर नई राजनीतिक इबारत लिखने की कोशिश की जा रही है।











