-उच्च स्तरीय शोध और प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशन वैश्विक पहचान के लिए आवश्यक : कुलपति
– एमजीसीयू, बिहार में केंद्रित कार्यशाला का हुआ आयोजन
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिहार के स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट साइंसेज़ के अंतर्गत वाणिज्य विभाग द्वारा “रिसर्च आइडिया से Q1/Q2 प्रकाशन तक: अकादमिक लेखन एवं जर्नल पब्लिशिंग” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आज आयोजन विश्वविद्यालय के जिला स्कूल परिसर में किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य शोधार्थियों एवं शिक्षकों को उच्च गुणवत्ता वाले शोध लेख तैयार करने तथा प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशन की प्रक्रिया से अवगत कराना था।
कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव के मुख्य संरक्षण में किया गया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय शोध और प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशन किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता और वैश्विक पहचान के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस प्रकार की कार्यशालाओं को शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यशाला के संयोजक वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. सुब्रत राय ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि आज के समय में शोध कार्य को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला शोधार्थियों और शिक्षकों को उच्च गुणवत्ता वाले अकादमिक लेखन, शोध की संरचना तथा उपयुक्त जर्नल चयन की प्रक्रिया को समझने में सहायक सिद्ध होगी।

कार्यशाला में प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। सऊदी इलेक्ट्रॉनिक विश्वविद्यालय, यूएई के डॉ. प्रकाश सिंह ने शोध विचारों के चयन, शोध पत्र की संरचना, तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के जर्नलों की अपेक्षाओं के अनुरूप लेख तैयार करने की प्रक्रिया पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं मौलिक शोध कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
इसी क्रम में विद्यासागर विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल के डॉ. सुदीन बाग ने पीयर रिव्यू प्रक्रिया, जर्नल इंडेक्सिंग, संदर्भ लेखन तथा शोध प्रकाशन से जुड़ी सावधानियों के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शोधार्थियों को यह भी बताया कि किस प्रकार सुव्यवस्थित शोध लेखन के माध्यम से Q1 और Q2 श्रेणी के प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशन की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के शोधार्थियों, शिक्षकों एवं स्नातकोत्तर छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। साथ ही विशेषज्ञों के साथ संवाद के माध्यम से शोध प्रकाशन की बारीकियों को समझा। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। जिसमें प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
यह कार्यशाला महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने तथा अकादमिक उत्कृष्टता को नई दिशा देने की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई।










