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आस्था और उल्लास के साथ मिथिला की 15 दिवसीय परिक्रमा शुरू, कचुरी से डोला विदा, श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

–आस्था और उल्लास के साथ मिथिला की 15 दिवसीय परिक्रमा शुरू, कचुरी से डोला विदा, श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर।
जनकपुरधाम से सटे कचुरी स्थित राम-जानकी मंदिर से सोमवार को मिथिला की ऐतिहासिक पंद्रह दिवसीय परिक्रमा श्रद्धा और भक्ति के माहौल में प्रारंभ हुई। परिक्रमा डोला को मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री कृष्ण कुमार यादव ने धार्मिक विधि-विधान और आस्था के साथ विदा किया।
‘राम-सीता की जय’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। डोला के साथ बड़ी संख्या में साधु-संत, नागा, सन्यासी और श्रद्धालु शामिल हुए। जानकी मंदिर, रत्न सागर और सुंदर सदन होते हुए डोला हनुमान गढ़ी पहुंचा, जहां रात्रि विश्राम किया जाएगा।


मंगलवार को डोला भारत के कलनेश्वर स्थान के लिए प्रस्थान करेगा, जहां भारत-नेपाल से बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु जुटेंगे। बुधवार को दुलहा सरकार (राम) और किशोरी (सीता) का डोला एक साथ गिरिजा स्थान (फूलहर) के लिए रवाना होगा। इसके बाद परिक्रमा क्रमशः मटिहानी, मड़ई, ध्रुव कुंड, कंचन वन, पर्वता और धनुषाधाम सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेगी।
29 फरवरी को परिक्रमा पुनः जनकपुरधाम पहुंचेगी और 1 मार्च को पंचकोसी परिक्रमा के साथ 133 किलोमीटर लंबी पंद्रह दिवसीय यात्रा का समापन होगा।
परिक्रमा के दौरान प्रत्येक पड़ाव पर स्थानीय ग्रामीणों व क्लबों द्वारा अन्न, जल, पेयजल, प्रकाश और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।
यह परिक्रमा मिथिला की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण मानी जाती है, जिसमें हर वर्ष हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।