भागवत से होता है मानव को कर्तव्यबोध : चंचला दीदी

-भागवत से होता है मानव को कर्तव्यबोध : चंचला दीदी

मुजफ्फरपुर/बंदरा।दीपक तिवारी। नवयुवक नाट्यकला परिषद् सह सांस्कृतिक मंच की ओर से घोसरामा ब्रह्मस्थान परिसर (पुस्तकालय) में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथा प्रवाचिका निकुंज मंजरी चंचला दीदी ने कहा कि भागवत कथा से ही मानव को अपने कर्तव्यों का सही बोध होता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु निश्चित होने के बावजूद मनुष्य उसे स्वीकार नहीं करता, यही सबसे बड़ी विडंबना है। जो लोग निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करते हैं, वे अपने जन्म और मरण—दोनों को सार्थक कर लेते हैं।
चंचला दीदी ने कहा कि जब प्रभु अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मानकर शरीर को प्रधान मान लेता है, जबकि शरीर नश्वर है। भागवत हमें यह शिक्षा देता है कि निस्काम कर्म ही सच्ची भक्ति है।


उन्होंने संसार को भगवान का सुंदर बगीचा बताते हुए कहा कि इसमें चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न-भिन्न प्रकार के फूल खिले हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्मों से इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करता है, तब-तब भगवान धरा पर अवतार लेकर सजनों का उद्धार और दुष्टों का संहार करते हैं।
कथा के दौरान उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति (ब्रह्माजी का प्राकट्य), भगवान के चौबीस अवतार, समुद्र मंथन, ध्रुव चरित्र और भक्त प्रह्लाद की कथा जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। इससे पूर्व आचार्य फुलकांत झा, विजय झा एवं मनोरंजन झा के सानिध्य में मुख्य यजमान नवीन कुमार एवं अमरेंद्र ठाकुर, कौशल किशोर ठाकुर एवं मौसम तिवारी ने संयुक्त रूप से व्यास पूजन किया।
कार्यक्रम में ललन त्रिवेदी, उपेंद्र ठाकुर, कमल किशोर, अनिल ठाकुर, महेश ठाकुर, रंजन ठाकुर, विमलेश ठाकुर सहित सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।