-“पत्तों के गिर जाने से, वृक्ष कभी मरा नहीं करते”
— मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा का भव्य आयोजन
मुजफ्फरपुर।दीपक।
रविवार को अयोध्या प्रसाद खत्री साहित्यिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्री गांधी पुस्तकालय, गोला रोड, मुजफ्फरपुर के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा का आयोजन हुआ। साहित्यिक सौहार्द और सृजनात्मक ऊर्जा से सराबोर इस आयोजन की अध्यक्षता कवि अशोक भारती ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी कवि प्रमोद नारायण मिश्र ने निभाई।
कवि गोष्ठी का शुभारंभ भोजपुरी के प्रसिद्ध रचनाकार भिखारी ठाकुर की परंपरा के संवाहक लोक कवि सतेंद्र कुमार ‘सत्येन’ द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को समर्पित श्रद्धांजलि रचना
“माटी की बोली सुनी चले खेतवा के किसान हो,
अपन पसीनमा से दिहलें मटिया के सान हो…”
से हुआ, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
संचालक प्रमोद नारायण मिश्र की संवेदनशील रचना “पहले चरणों पर फूल चढ़ाया, फिर राहों पर शूल बिछाया…” के बाद कवि ओम प्रकाश गुप्ता की चर्चित रचना “पत्तों के गिर जाने से, वृक्ष कभी मरा नहीं करते…” ने खूब सराहना बटोरी। हास्य कवि डॉ. जगदीश शर्मा ‘दवा दारू वाले’ की रचना “तोषक, रजाई-कंबल का भार भी, हल्का तन को लगता है…” ने श्रोताओं को ठहाकों से भर दिया।
कवि सुमन कुमार मिश्र की रचना “कभी-कभी बच्चों को भी गांव घुमा दीजिए”, सौंदर्य के सुकुमार कवि अंजनी कुमार पाठक की “ठंडी हवा है, सर्द है मौसम, कब आओगे मेरे प्रियतम”, बज्जिका के प्रसिद्ध कवि रघुनाथ मोहब्बतपुरिया की “हम त बिहारी हई भैया…”, उमेश राज की गजल “दश्त-ए-सहरा में कोई जुगनू झिलमिलाता है…” तथा दीनबंधु आज़ाद के मुक्तक “सपनों की मंज़िल पास नहीं होती, ज़िंदगी हर पल उदास नहीं होती…” ने गोष्ठी को ऊँचाई दी।

साम्यवादी विचारधारा के कवि रामबृक्ष राम ‘चकपुरी’ की रचना “मखमली गलीचों पर बैठे हैं, अगली पंक्ति में तोंद फुलाकर…” ने सामाजिक यथार्थ पर तीखा प्रहार किया। अध्यक्षीय वक्तव्य में कवि अशोक भारती की रचना “धूप पर जब लिखोगे, बात हकीकत की होगी…” ने समसामयिक संवेदनाओं को स्वर दिया। वहीं परशुराम प्रसाद ब्याहुत की “मेहमान बनके मुझे तंग ना कीजिए” और अरुण कुमार तुलसी की “आंसुओं के लय पर छलकते हैं, दिल के पैमाने…” ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रसिद्ध समाजसेवी एवं नागरिक मोर्चा के महासचिव मोहन प्रसाद सिन्हा ने उपस्थित कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। मासिक काव्य गोष्ठी के संयोजक सुमन कुमार मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया। तत्पश्चात अध्यक्ष के आदेश से आगामी आयोजन तक कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की गई।











