-विदा हुआ यह वर्ष सुहाना, अनुभव अपना सौंप गया
-श्री नटवर साहित्य परिषद् की मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा सम्पन्न
मुजफ्फरपुर।दीपक।
रविवार को श्री नवयुवक समिति ट्रस्ट, छोटी सरैयागंज रोड, मुजफ्फरपुर के सभागार में श्री नटवर साहित्य परिषद् के तत्वावधान में मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा का आयोजन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। साहित्यप्रेमियों से खचाखच भरे सभागार में काव्य, भाव और संवेदनाओं का सुंदर संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी एवं बज्जिका के वरिष्ठ कवि डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी ओम प्रकाश गुप्ता ने कुशलतापूर्वक निभाई। कवि गोष्ठी का शुभारंभ आचार्य जानकीबल्लभ शास्त्री की रचना के सस्वर पाठ से हुआ, जिसे ओम प्रकाश गुप्ता ने प्रस्तुत किया।

अध्यक्षीय काव्य पाठ में डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह की रचना “फागुन आया संग-संग उल्लास लाया” ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हास्य-व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. जगदीश शर्मा की रचना “मैं मूर्खों की जमात में, पढ़ा-लिखा जवान हूँ…” ने खूब ठहाके बटोरे। नववर्ष के स्वागत भाव से ओतप्रोत ओम प्रकाश गुप्ता की रचना “विदा हुआ यह वर्ष सुहाना, अनुभव अपना सौंप गया” को श्रोताओं ने विशेष सराहना दी।
इसके अतिरिक्त कवि रामबृक्ष राम चकपुरी की “तूफानी बयार के बीच, राष्ट्र की नौका डोल रहा”, कोमल भावनाओं के कवि अंजनी कुमार पाठक की “ठंडी हवाएं, सर्द है मौसम, कब आओगे मेरे प्रियतम”, प्रमोद नारायण मिश्र की “लगता है वीरान शहर है…”, चंद्रशेखर प्रसाद सिंह की “सूर्य होकर भी जो, स्वयं दीपक हो गया…” तथा रघुनाथ मोहब्बतपुरिया की बज्जिका रचना “लिचिया नाम कईले बा…” ने श्रोताओं की भरपूर तालियां बटोरीं।
कवि गोष्ठी सह मुशायरा में नंदकिशोर पोद्दार, अजय कुमार, सुरेंद्र कुमार, चिराग पोद्दार सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ. जगदीश शर्मा ने सभी कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। तत्पश्चात अध्यक्ष के आदेश से आगामी आयोजन तक कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की गई।
यह कवि गोष्ठी साहित्यिक चेतना, सांस्कृतिक समरसता और भावनात्मक अभिव्यक्ति का एक यादगार आयोजन बनकर उपस्थितजनों के मन में अंकित हो गई।











