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मानसून की बेरुखी ने नदी पुल के तीसरी पीढ़ी से मिलाया

-मानसून की बेरुखी ने नदी पुल के तीसरी पीढ़ी से मिलाया

-सकरी मन नदी की तस्वीर
-पहले सालों में जून-जुलाई में तेज धारा यहां बहने लगती थी
-साल 1934 से पहले यह पुरानी बागमती नदी से जुड़ी मुख्य धारा में शामिल थी

मानसून के इंतज़ार में सुखी ताल-तलैया।बन्दरा प्रखण्ड के सकरी मन नदी की यह तस्वीर। नदी में दो समांतर पुल (एक लोहे एवं दूसरा सीमेंट की पुल)है। सीमेंट पुल से उत्तर दिशा में पूरी नदी सुखी पड़ी है।तेज गर्मी-धूप में नदी में जलकुंभियां भी झुलसकर सुखी है।

वहीं लोहे के पुल के दक्षिण गहरी जलस्त्रोत(सकरी मन नदी) स्थल भी अब पोखर का रूप ले चुका है।इसके सहारे माल-मवेशीयों के स्नान एवं खेतों की सिंचाई चल रहे हैं।इसी में यहां तीसरी पुरानी लोहे के पुल का नदी में डूबा अवशेष भी अब पानी से बाहर झांक रहा है।