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मुजफ्फरपुर: बंध्याकरण में बन्दरा पिछड़ा,लक्ष्य के मुकाबले महिला बंध्याकरण 98,पुरुष नशबंदी जीरो

-बंध्याकरण में बन्दरा पिछड़ा,लक्ष्य के मुकाबले महिला बंध्याकरण 98,पुरुष नशबंदी जीरो

-महिलाएं हैं बोल्ड,पुरुष हैं फेल
-पुरूष नशबंदी में अबतक प्रखण्ड का खाता भी नहीं खुला
-बंध्याकरण में महिलाएं हीं आगे

मुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक।

सरकार जनसंख्या नियंत्रण को लेकर भले हीं कई तरहों के स्वास्थ्य एवं जागरूकता कार्यक्रम चला रही है,लेकिन प्रखंड एवं आसपास के क्षेत्र में लक्ष्य के मुकाबले बंध्याकरण के प्रति लोग जागरुक नहीं है। बन्दरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार प्रखण्ड में अप्रैल माह से अब तक बंध्याकरण में कुल 562 लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 98 बंध्याकरण कराए गए हैं। महिलाओं में बंध्याकरण के प्रति तो जागरूकता दिखती भी है, लेकिन पुरुष इसके मुकाबले बिल्कुल ही पीछे हैं। पुरुष नसबंदी को लेकर अब तक खाता भी नहीं खुले हैं। इतना ही नहीं विभागीय सूत्रों का बताना है कि पिछले साल भी पुरुष नसबंदी का खाता नहीं खुला। बन्दरा प्रखंड में 12 पुरुष नसबंदी का लक्ष्य पिछले साल भी दिए गए थे,लेकिन एक भी खाता नहीं खुला। अबकी साल भी 12 पुरुष नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है,लेकिन अब तक खाता नहीं खुल सके हैं। प्रखण्ड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर नौशाद अहमद ने इस संदर्भ में बताया कि लोगों में जागरूकता की कमी है। पुरुष प्रधान देश हैं। पुरुष विभिन्न कारणों से नसबंदी नहीं कराना चाहते हैं, वहीं कई परिवारों की महिलाएं भी पुरुषों के नसबंदी करने को लेकर जागरूक नहीं दिखती है।कई बार तो सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाएं खुद आ कर बंध्याकरण कराती हैं और विभिन्न कारणों से अपने परिवार के पुरुष सदस्यों को ऐसा करने से रोकती हैं या पुरुष नशबंदी के प्रति असहमत होती हैं। लिहाजा पुरुष नसबंदी के मामले में अब तक खाता भी नहीं खुल सका है। उन्होंने बताया कि यह स्थिति सिर्फ बन्दरा ही नहीं अन्य प्रखंड क्षेत्र की भी है।वहीं महिला बंध्याकरण कुल 562 लक्ष्य के विरुद्ध 98 बंध्याकरण कराए गए हैं।बंध्याकरण पखवाड़ा की शुरुआत की गई है।जल्द हीं लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा।

नहीं पड़ता है कोई कुप्रभाव,पुरुषों को बेझिझक आगे आना होगा:

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा कि परिवार नियोजन में सिर्फ महिलाओं की भागीदारी ही नहीं बल्कि पुरुषों की भी भागीदारी होनी चाहिए। इसके लिए पुरुषों को भी बेझिझक आगे आना चाहिए।
महिला बंध्याकरण से सरल पुरुष नसबंदी की प्रक्रिया है। पुरुष नसबंदी को लेकर समाज में कई प्रकार का भ्रम फैला हुआ है। इस भ्रम को तोड़ना होगा। उन्होंने बताया कि छोटा परिवार सुखी परिवार की अवधारणा को साकार करने के लिए पुरुष को आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाने की जरूरत है। बताया कि नसबन्दी से पुरुषों की पौरुषता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। वहीं उन्होंने बताया कि नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि भी सरकार द्वारा दी जाती है।
नसबंदी के लिए पुरुष लाभार्थी को 3000 रुपए एवं महिला बंध्याकरण के लिए लाभार्थी को 2000 रुपए की प्रोत्साहन की राशि लाभार्थियों के खाते में भेजी जाती है।