–79 साल बाद भी ‘चचरी पुल’ के सहारे जिंदगी, औराई में विकास के दावे फेल
मुजफ्फरपुर। आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बावजूद जिले के औराई प्रखंड में बुनियादी विकास अब भी अधूरा है। प्रखंड के कोकिलवारा गांव में स्थित जर्जर ‘चचरी पुल’ आज भी लोगों की मजबूरी बना हुआ है, जिसे पार कर रोजाना सैकड़ों लोग अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
बताया जाता है कि यह पुल अंग्रेजों के जमाने की पुरानी संरचना पर बना है। पहले यहां रेलवे ट्रैक बिछाया गया था, जिसके ऊपर लकड़ी और बांस से चचरी तैयार कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि वर्षों बाद भी इसी अस्थायी व्यवस्था पर लोग आवाजाही करने को मजबूर हैं। पुल की हालत इतनी जर्जर है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
यह मार्ग मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के बीच महत्वपूर्ण संपर्क का काम करता है। एक ओर मुजफ्फरपुर, जिसे उत्तर बिहार का प्रमुख शहर माना जाता है, तो दूसरी ओर सीतामढ़ी, जो माता जानकी की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है—इन दोनों जिलों के बीच हजारों लोगों का रोजाना आवागमन इसी पुल से होता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से पक्का पुल निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। हालात से नाराज ग्रामीणों ने व्यंग्य में इस जर्जर पुल को ही “ग्लास ब्रिज” का नाम दे दिया है, जो उनके दर्द और सिस्टम के प्रति गुस्से को दर्शाता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक वे इस ‘मौत के पुल’ से गुजरने को मजबूर रहेंगे और कब सरकार व प्रशासन उनकी समस्या का स्थायी समाधान करेंगे। अब लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द यहां पक्का और सुरक्षित पुल बनाया जाए, ताकि आवागमन सुगम हो सके और किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।











