बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ: गोप गुटका धरना प्रदर्शन

img-20200419-wa0006-72781328379817793567.jpg
img-20200419-wa0000-85277475373482181001.jpg
img-20200419-wa0005-74006513932818183178.jpg

मोतिहारी।अशोक वर्मा
केंद्र की मोदी सरकार की जनविरोधी-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ ऐक्टू सहित 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों और सेवा महासंघों के आह्वान पर देशव्यापी बिरोध दिवस के तहत मोतिहारी में महासंघ गोप गुट के कार्यालय में लॉक डाउन के नियमों का पालन करते हुए ऐक्टू और महासंघ कार्यकर्ताओं ने धरना/प्रदर्शन किया।इस मौके पर ऐक्टू के जिला संयोजक विष्णुदेव प्रसादयादव,महासंघ गोप गुट के मुख्य राज्य सलाहकार भाग्यनारायण चौधरी,रेलवे कर्मचारी यूनियन के नेता अच्युतानंद पटेल,भैरव दयाल सिंह,महासंघ गोप गुट के जिला सचिव भूपेंद्र कुमार लाल,वीरेश सिंह,बैरिस्टर मांझी,नगर परिषद कर्मचारी महासंघ के नेता भरत राम,संजीव सिंह,वीरबहादुर सिंह,विकास पासवान,रसोइया संघ के आनंद कुमारआर्य,अशोक कुशवाहा, अधिवक्ता राघव साह, कातिब संघ के जीतेन्द्र सिंह आदि नेताओं ने अपने विचारों को रखा और नितीश एवं मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की।


इस तरह के कार्यक्रम हरसिद्धि के गायघाट में रसोइया संघ की जिला अध्यक्ष कुमान्ती देवी,बिहार राज्य निर्माण यूनियन के जिला संयोजक राजेश कुमार ने मानिकपुर में,खेग्रामास के जिला संयोजक जीतलाल सहनी, रूपलाल शर्मा,मोहन राम ने नारायण चौक,छौड़ादानो में,आशा संघ की देवंती देवी ने रक्सौल में किया।
धरना को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार कोरोना संकट का इस्तेमाल मजदूरों के अधिकारों को ख़त्म करने और दमन कर गुलाम करने में कर रही है।लंबे संघर्षों व कुर्बानियों से हासिल मजदूरों के श्रम अधिकारों को समाप्त कर पूंजीपतियों के मर्जी के हवाले मजदूरों को किया जा रहा है।बिहार की नितीश सरकार सहित भाजपा शासित गुजरात,मध्य प्रदेश,हरियाणा और यू पी राज्यों सरकारों ने 8 घंटे के कार्य दिवस को बढ़ाकर 12 घंटे करने की अधुसूचना जारी कर दी है।यह सब केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट परस्त नीतियों को लागू करने के लिए किया जा रहा है।प्रवासी एवं ग्रामीण मजदूरों को कोई भी राहत नही दिया जा रहा है।20लाख करोड़ का राहत पैकेज देश के मजदूरों,किसानों और छात्र-नौजवानों के लिए धोखा साबित हुआ है।इसमें से बड़ा हिस्सा पूंजीपतियों के लोन माफ़ी और कर्ज के रूप में कॉर्पोरेट घरानों को दिया गया है।आत्मनिर्भरता के नामपर देश के प्राकृतिक संसाधनों और महत्वपूर्ण सेवा क्षेत्रों का निजीकरण किया जा रहा है।यह देश की नीलामी और मजदूरों के गुलामी का रास्ता है जिसे मेहनत कश मजदुर वर्ग व किसान बर्दाश्त नही करेंगे।सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए और तत्काल मजदुर व किसानों के हित में नये पैकेज पेश करना चाहिए।


आगे नेताओं ने मांग किया कि एक अध्यादेश के जरिये जल्द 8 घंटेके कार्य दिवस को बहाल करने और श्रम अधिकारों में कटौती का फैसला वापस ले,प्रवासी मजदूरों सहित सभी गरीबों,मजदूरों व किसानों के लिए नया राहत पैकेज घोषित करे, सभी गरीबों -मजदूरों को तीन महीने का फ्री राशन और 10 हजार रूपये लॉक डाउन भता दिया जाये।मृतक प्रवासी मजदूरों के परिजनों को 20 -20 लाख रूपये मुआवजा दिया जाये,कोयला,रेलवे,हवाई अड्डो,शिक्षा,कृषि आदि क्षेत्रों के निजीकरण पर रोक लगाया जाये,कोरोना वारियर्स के बतौर कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों,सफाई कर्मचारियों,आशा कार्यकर्ताओं,सेविका-सहायिकाओं,रसोइयों,पुलिस कर्मियों आदि लोगों के साथ सभी सरकारी कर्मचारियों व शिक्षकों को पर्याप्त कोरोना सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराया जाये,सभी का 50 लाख रूपये का जीवन बीमा किया जाये,जिले में समाहरणालय,हॉस्पिटल व निबंधन विभाग में जून 2019 में बहाल 201 चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों का वेतन शीघ्र भुगतान किया जाये,कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद किया जाये,8 घंटे से ज्यादा काम का ओवरटाइम लाभ का भुगतान किया जाये।

a2znews