मनाया जा रहा गुड़ी पड़वा पर्व,इस दिन भगवान राम ने किया था बालि का वध

 

चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा का त्यौहार मनाया जाता है। इस बार यह 25 मार्च को है। इस पर्व को लेकर खास मान्यताएं हैं। गुड़ी ध्वज यानि झंडे को कहा जाता है और पड़वा, प्रतिपदा तिथि को। मान्यता है के इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था। दक्षिण भारत क्षेत्र में मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ही वो दिन था जब भगवान श्री राम ने बालि का वध कर दक्षिण भारत के लोगों को मुक्त करवाया। इसी कारण इस दिन गुड़ी यानि विजयपताका फहराई जाती है।घरों में लगाते हैं बंदनवार:

इस पर्व पर लोग अपने घर को आम के पत्तों की बंदनवार से सजाते हैं। लोग घरों की सफाई कर रंगोली, बंदनवार आदी से घर, आंगन एवं दरवाजों को सजाते हैं। घर के आगे एक गुड़ी यानी झंडा रखा जाता है। इसी में एक बर्तन पर स्वास्तिक चिन्ह बनाकर उस पर रेशम का कपड़ा लपेटकर उसे रखा जाता है। गुड़ी को विजय का प्रतिक मान का उसकी पूजा की जाती है।बनते हैं खास व्यंजन:

स्वास्थ्य के नजरिए से भी इस पर्व का महत्व है। इसी कारण गुड़ी पड़वा के दिन बनाए जाने वाले व्यंजन खास तौर पर स्वास्थ्य वर्धक होते हैं। चाहे वह आंध्र प्रदेश में बांटा जाने वाला प्रसाद पच्चड़ी हो, या फिर महाराष्ट्र में बनाई जाने वाली मीठी रोटी पूरन पोली हो। पच्चड़ी के बारे में कहा जाता है कि खाली पेट इसके सेवन से चर्म रोग दूर होने के साथ साथ मनुष्य का स्वास्थ्य बेहतर होता है। वहीं मीठी रोटी भी गुड़, नीम के फूल, इमली, आम आदि से बनाई जाती है। वहीं कुछ स्थानों पर श्रीखंड-पूड़ी खाने की भी परंपरा है।

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