स्पॉट: चैत्र नवरात्र में नहीं होगी मां मुंडेश्वरी की ऑनलाइन पूजा,श्रद्धालु घरों में ही करेंगे आराधना

संवाददाता।कैमूर

बिहार के कैमूर में इस बार चैत्र नवरात्र में मां मुंडेश्वरी की ऑनलाइन पूजा नहीं होगी. कोरोना को लेकर आज से चैत्र नवरात्र शुरू हो गया है. मगर विगत कई दशकों के इतिहास में यह पहली बार होगा कि आज से नवमी तक श्रद्धालु देवी धाम पहुंचने के बजाये घरों में ही मां मुंडेश्वरी देवी का पूजन करेंगे. ऑफलाइन के बाद विगत एक साल पहले से शुरू हुई ऑनलाइन पूजा भी कोरोना को लेकर चैत्र नवरात्र में नहीं होगी. यह जानकारी धार्मिक न्यास परिषद के सचिव अशोक कुमार सिंह ने दी. उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पूजा के दौरान मंदिर के पुजारियों की उपस्थिति होती है, जिनके माध्यम से मां की आरती व पूजन करा कर भक्तों को ऑनलाइन पूजा-पाठ व मां के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है. लेकिन, कोरोना के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर देवी धाम के मंदिर का पट बंद होने के कारण भक्तों को मां की ऑनलाइन पूजा करनी भी मुश्किल है. इस बार ऑनलाइन पूजा धाम में नहीं होगी.

10 दिन पहले ही बंद कर दिया गया है मंदिर:

दरअसल, चीन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, अमेरिका, ईरान सहित कई देशों में कोरोना वायरस का जाल फैलने के बाद भारत में भी इस वायरस के संक्रमण का खतरा मंडराते देख यहां की केंद्र सरकार व ट्रस्ट अधिकारी के निर्देश पर मुंडेश्वरी धाम श्रद्धालुओं के लिए करीब 10 दिन पहले ही बंद कर दिया गया था. तब से अब तक निकटतम क्षेत्र अंतर्गत श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज से धाम में पहुंच कर आदि शक्ति माता की पूजा करनेवाले श्रद्धालुओं के लिए मां की प्रतिमा का दर्शन करना भी दुश्वार हो गया है.इस बीच जानकारी के अभाव में रोजाना धाम में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, मगर मंदिर का पट बंद देख धाम की सीढ़ियों पर से ही माथा टेक व श्रद्धाभाव से अपने हाथों में मां के चढ़ावे के लिए लायी पूजा सामग्रियों को दूर से ही समर्पित कर चले जा रहे हैं. स्थानीय निवासी सुनील अग्रवाल, संजय उर्फ भोला सिंह, अंशु सिंह, गुड्डू चौरसिया सहित कई अन्य श्रद्धालुओं ने आदि शक्ति मुंडेश्वरी मां के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए बताया कि इससे पूर्व ऐसी स्थिति साल में दो बार पड़ने वाले किसी भी नवरात्र में नहीं आयी थी. वह प्रत्येक नवरात्र में पिछले कई वर्षों से माता के दर्शन-पूजन करते आ रहे हैं. लेकिन, इस नवरात्र में कोरोना वायरस ने उन्हें आदि शक्ति माता के चरणों में उनकी आराधना करने से वंचित कर दिया.

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