बिहार की फर्जी डिग्री पर गुजरात में खुले क्लिनिक!

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संवाददाता।मुजफ्फरपुर

बाबा साहेब आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के नाम से जारी बीएचएमएस के फर्जी सर्टिफिकेट से गुजरात में 100 से अधिक क्लिनिक चल रहे हैं. गांधीनगर क्राइम ब्रांच की टीम अब तक 80 से ज्यादा सर्टिफिकेट को जब्त कर चुकी है. सभी सर्टिफिकेट 2010-11 के सत्र में जारी किये गये हैं. इंस्पेक्टर ओम डेन देसाई के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की टीम जनवरी महीने में दो बार विवि थाने आ चुकी है. इस दौरान 11 जनवरी को एक और 31 जनवरी को नौ सर्टिफिकेट की जांच करायी गयी. इसमें सभी दस डिग्री फर्जी पाये गये. क्राइम ब्रांच की टीम ने इसकी रिपोर्ट विवि के रजिस्ट्रार कर्नल अजय कुमार राय और थानेदार रामनाथ प्रसाद को सौंप दी है.

जल्द ही 70 और सर्टिफिकेट के सत्यापन के लिए क्राइम ब्रांच की टीम बिहार विवि आ सकती है. थानेदार रामनाथ प्रसाद ने बताया कि गुजरात में हम्योपैथ के फर्जी सर्टिफिकेट पर 100 से अधिक झोला छाप डॉक्टर काम कर रहे थे. अबतक गांधीनगर क्राइम ब्रांच की टीम 10 डिग्री का सत्यापन करा चुकी है. क्राइम ब्रांच की टीम से गिरोह के बारे में पूछताछ करने के बाद कई अहम सुराग हासिल हुए है. बिहार विश्व विद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्री बांटनेवाले गिरोह का सुराग जुटाने के लिए जल्द ही पुलिस गुजरात जायेगी.

गिरोह का बड़ा नेटवर्क. प्रदेश में सिर्फ बिहार विश्वविद्यालय ही बीएचएमएस के कोर्स का संचालन करता है. गुजरात या दूसरे राज्यों के लोग अपने राज्य की बजाये बिहार विवि की डिग्री फर्जी तरीके से बनवा लेते हैं, ताकि किसी को शक नहीं हो. दूसरे राज्यों के दलालों का नेटवर्क स्थानीय दलालों से मिलकर फर्जी डिग्री तैयार करते हैं. पिछले दिनों विश्वविद्यालय परिसर में ऐसे कुछ दलालों को पकड़ा भी गया था.

गुजरात पुलिस का कहना है कि अब तक जिन दस डॉक्टरों की डिग्री फर्जी पायी गयी है, उनके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया जायेगा.

गांधीनगर की क्राइम ब्रांच की जांच में 10 सर्टिफिकेट फर्जी निकले, 80 जब्त:

राजकोट में पकड़ा गया था मामला:

गुजरात के राजकोट में दिसंबर, 2019 में होम्योपैथी के एक डॉक्टर की डिग्री को फर्जी बताते हुए थाने में शिकायत दर्ज हुई थी. पुलिस ने डिग्रीधारी डॉक्टर मोहम्मद मुख्तार से जब पूछताछ की, तो वह संतोषप्रद जवाब नहीं दे सका. पुलिस टीम ने उसकी डिग्री को जब्त कर गांधीनगर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया था. मुख्तार से पूछताछ के आधार पर करीब 80 संदिग्ध डिग्रीधारी को सर्टिफिकेट जांच के लिए जब्त किया गया था.

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