श्रद्धांजलि:पूर्व कुलपति डॉ वीरेंद्र पांडेय के निधन पर जर्नलिस्ट वेलफेयर सोसाइटी ने की शोक सभा

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मोतिहारी ।अशोक वर्मा ।

जिले के जाने-माने पत्रकार एवं मगध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ वीरेंद्र पांडेय की स्मृति में नगर के पत्रकार भवन में शोक सभा का आयोजन किया गया। संचालन करते हुए सहारा के ब्यूरो चीफ संजय ठाकुर ने कहा कि वीरेंद्र पांडेय बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। शिक्षक के रूप में, पत्रकार के रूप में, कलाकार के रूप में, तथा समाजसेवी के रूप में उनका कार्य आज भी बोल रहा है मोतिहारी में उन्होंने बहुत कुछ किया है। आज भी हमारे बीच नहीं है ,लेकिन उनकी यादें हमेशा रहेगी ।वरिष्ठ पत्रकार अशोक वर्मा ने कहा की वीरेद्र पांडेय के बारे में जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। श्री वर्मा ने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि वीरेंद्र पांडेय खोजी पत्रकारिता के मामले में बहुत ही निडर और निर्भीक थे ।विषय मिल जाने पर किसी भी हालत में नहीं रुकते थे। बेतिया में हम लोग कवरेज मे गए थे, लेकिन वहां जाने के बाद जानकारी मिली कि कवि नेपाली के भाई रिक्शा चलाते हैं और सुबह 5 बजे उनसे मुलाकात होगी ।वीरेंद्र पांडेय ने कहा कि हम लोग कवरेज करके ही जाएंगे, और हम लोगों ने सुबह कवरेज किया। उसने उसको वीरेंद्र पाण्डेेय जी के साथ एक बार हम लोग बेतिया में घूम रहे थे तो वहां के शहीद पार्क में 8 शहीदों की मूर्तियां लगी हुई है मैंने कहा कि क्यों नहीं हम लोग शहीद परिवार को देखें कि आज उनकी स्थिति क्या है। वहां पर हम लोग गणेश राव का परिवार ढूंढे । पुरानी गुदरी में उनके तीन बेटे थे तीन धूर जमीन में वे रहते थे और दैनिक मजदूरी करते थे। उस रिपोर्टिंग को भी कई पत्र-पत्रिकाओं में हम लोगों ने छापा और उस परिवार को सरकार से राहत मिली। पाणडेय जी का संघर्ष भी शुरुआती दौर में हुआ ।काफी काफी लोग उनके खिलाफ थे ,लेकिन इसका मूल कारण था कि वह इतने प्रतिभावान थे कि उनका विरोध होता था। प्रतिभा और गुण के बल पर विश्वविद्यालय के कुलपति तक बने। हिंदुस्तान दैनिक व्यूरो सतीश मिश्रा ने बताया कि जब मैं गया में पोस्टेड था उस समय वीरेंद्र पांडेय कुलपति हुए थे।वे इतने बोल्ड थे कि एक बार कमिश्नर ने उनकी गाड़ी पर लगे लाल बत्ती पर विरोध किया तो वीरेंद्र पांडेय ने कहा कि मेरा प्रोटोकॉल है और राज्यपाल के बाद कुलपति का स्थान आता है इसलिए मैंने अपनी गाड़ी पर लाल बत्ती लगाया है । मोतिहारी में आने के बाद मुझे उनके बारे मे विशेष जानकारी मिली ,उनके और बहुआयामी व्यक्तित्व के गुणों का मै कायल हो गया। संगीत प्रेमी होने के कारण उनसे मेरी काफी नजदीकी थी।वे एक संगीतकार थे, गीतकार भी थे काफी कुछ उनसे सुनने का मौका मिला ।दैनिक जागरण वयूरो अनिल तिवारी ने कहा कि वे हमारे गार्जियन थे मेरे कई लेखों एवं आर्टिकल पर उन्होंने कमेंट भी किया था कुछ बताया और सिखाया भी था। जमकर मेरी प्रशंसा भी की थी। वे बड़े सहज थे। वरिष्ठ पत्रकार नगेंद्र जायसवाल ने कहा कि मनुष्या चला जाता है ,लेकिन उसकी यादें और कार्य रह जाती है।पाण्डे जी ने आई हॉस्पिटल खुलवाया। आज आई हॉस्पिटल के कारण दिल्ली का ट्रीटमेंट मोतिहारी में होने लगा ,काफी लोग लाभान्वित हुए जो लोग लाभान्वित हुए उनकी दुआ बीरेंद्र पांडे को मिली और वीरेद्र पांडेय उन्हीं की दुआ के बदौलत कुलपति तक बने ।हिंदी विभागाध्यक्ष मुंशी सिह कालेज डॉ अरूण कुमार ने कहा कि चंपारण सांस्कृतिक महोत्सव करके वीरेंद्र।पाणडेय ने सांस्कृतिक क्षेत्र में अपना योगदान दिया। मोतिहारी में हेमा मालिनी को उतारा और पाकिस्तान से गुलाम अली को भी बुलाया। साथ मे देश के बड़े-बड़े कलाकारों को मोतिहारी में बुलाकर राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर जिले को स्थापित किया। अभी मार्च में तीन दिवसीय चंपारण सांस्कृतिक महोत्सव की घोषणा उन्होंने की थी ,लेकिन इस बीच अचानक चले गए ।अब हम लोगों को उनके बताए मार्ग पर चलना है ।तथा उन्होंने सांस्कृतिक आंदोलन खड़ा किया, बड़े-बड़े कलाकारों को बुलाने की परंपरा आरंभ की हम उसे चालू रखेंगे और यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शायराना अंदाज में कईयो ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की । दैनिक भास्कर वयूरो संजय सिंह ने बताया कि पांडे जी से मुझे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला है ।आज तक के पत्रकार सचिन पांडेय तथा और भी कई पत्रकार, राजनीतिक क्षेत्र के लोगों ने भी उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर जमकर पकाश डाला और उनकी प्रशंसा की। संबोधित करने वालों में तनवीर हसन ,जोहा,ओजैर अजूम एवं अन्य कई थे ।कार्यक्रम के अंत में 2 मिनट मौन रखकर के वीरेद्र पांडेय के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई साथ साथ उनकी तस्वीरों पर सभी ने पुष्प चढ़ाकर उनको नमन किया।

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