स्पेशल : 10 सालों से मनाया जाता है विश्व नारियल दिवस,जानिए 80 सालों तक रहता है यह हरा-भरा!

 

नरेंद्र झा । मोतिहारी(बिहार)।

विश्व नारियल दिवस की स्थापना दो सितंबर 2009 को हुई। इस दिवस का उद्देश्य इस फल के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है। इसके साथ ही नारियल को उद्योगों के कच्चे माल के रूप में उपयोग किए जाने का प्रोत्साहन देना है। इस दिवस को एशियाई प्रशांत नारियल समुदाय के गठन की याद में मनाया जाता है। यह एक संगठन है, जिसमें 18 सदस्य हैं। भारत इसका संस्थापक सदस्य है।
आमदनी:नारियल के रेशे से बनी वस्तुओं गद्दे, थैले आदि दैनिक उपयोग की वस्तुएं तैयार की जा रही हैं। इनके निर्यात से भारत को हर साल लगभग 470 करोड़ रुपये की आमदनी होती है।
वैज्ञानिक नाम:नारियल का वैज्ञानिक नाम कोकस न्यूसिफेरा है। यह पॉम फैमिली का है।

80 साल तक रहता है हरा-भरा:

पिपरकोठी के कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने बताया कि नारियल का पेड़ लगभग 80 साल तक हरा-भरा रहता है। इस फसल में एक बार निवेश करना होता है। इस पर सूखा, पाला, आंधी और गर्मी का कोई असर नहीं होता। इसका पानी कैंसर के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। नारियल को फर्स्ट फ्लोर फसल कहा जाता है। खेत में 15-15 फीट की दूरी पर पोधे लगाए जाते हैं। बीच की खाली जगह ग्राउंड फ्लोर में फूल गोभी, आलू, प्याज, भाजी, टमाटर की फसल उगाई जा सकती है।
इससे सालभर आमदनी होगी।

विभिन्न उत्पाद:

नारियल चिप्स, नारियल दूध, नारियल शक्कर, नारियल नीरा, डाब, नारियल शहद नारियल गुड़, नारियल दूध शेक, नारियल स्नैक्स विर्जिन नारियल तेल, नारियल नेचुरल क्रीम, नीरा कुकीज समेत अन्य उत्पादों के बनाने में काफी लोगों को रोजगार मिलेगा।

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