अच्छी ख़बर: निजी क्लिनिक ने पैसे का किया था डिमांड, सदर अस्पतला में प्रभारी CS के इलाज से महिला को मिली जीवनदान!

 

*प्रभारी सीएस की पहल से गंभीर स्थिति में महिला की बचाई गई जान

*महिला की शरीर में मात्र दो यूनिट ही था खून

*सदर अस्पताल में महिला का चल रहा है इलाज

*समय पर नहीं चढ़ाया जाता खून तो हो सकती थी महिला की मृत्यु

मो.अंजुम आलम,जमुई (बिहार)।

सदर अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन सह उपाधीक्षक डा. सैयद नौशाद अहमद की तत्परता से गुरूवार को एक प्रसुता की जान बचाई जा सकी।उक्त महिला का इलाज स्वयं उपाधीक्षक ने अपनी निगरानी में शुरू किया और फिलवक्त महिला खतरे से बाहर बताई जा रही है।महिला की पहचान खैरा प्रखंड के चुनकातरी गांव निवासी मुर्शीद आलम की पत्नी सलमा खातून के रूप में हुई है।महिला के साथ आई परिजन जहाना खातून ने बताया कि गुरूवार की सुबह लगभग 6 बजे वे लोग खैरा अस्पताल प्रसव के लिए पहुंचे थे।लगभग 9 बजे सुबह सलमा ने एक बच्चे को जन्म दिया।बच्चा स्वास्थ्य है लेकिन बच्चे के जन्म के बाद महिला के शरीर से खून बहने लगा जिसे देखकर खैरा अस्पताल के चिकित्सक ने रेफर कर दिया। तब परिजनों ने महिला को इलाज के लिए शहर के एक निजी क्लिनीक पर लाया जहां डाक्टर ने महिला की इलाज के लिए काफी अधिक राशि का मांग किया।

उतनी राशि नहीं होने के वजह से प्रसूता के साथ परिजन भी निजी क्लिनिक के बाहर खड़े थे।तभी संयोगवश उस ओर से सदर अस्पताल जा रहे उपाधीक्षक डा.सैयद नौशाद अहमद को परिजनों ने देख लिया और मरीज को देखने को कहा।मरीज की स्थिति गंभीर होने की वजह से उपाधीक्षक ने मानवता देखते हुए महिला को सदर अस्पताल जाने की बात कही।तब महिला के परिजनों ने आनन-फानन में महिला को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां उपाधीक्षक ने अपनी निगरानी में महिला चिकित्सक डा.शालनी द्वारा महिला का इलाज कराया गया। साथ ही ब्लड बैंक से खून लाकर महिला को चढ़ाया गया। उपाधीक्षक ने बताया कि महिला के शरीर में मात्र दो यूनिट ही खून बचा था, अगर सही समय पर महिला के शरीर को खून नहीं चढ़ाया जाता तो उसकी मौत भी हो सकती थी। फिलवक्त महिला खतरे से बाहर बताई जा रही है।

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