तिलडीहा दुर्गा मंदिर में श्रद्धालूओं ने 8 हजार पाठा की चढ़ाई बलि

कुमार सुबोध सिंह | शंभूगंज/बांका

शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन स्थल व तांत्रिक शक्ति सिद्धि पीठ के नाम से प्रसिद्ध तिलडीहा दुर्गा मंदिर में बुधवार को 8 हजार 624 पाठा की बलि चढ़ाई गई। इसको लेकर श्रद्धालूओ की भीड़ बुधवार की सुबह से ही लगना प्रारंभ हो गया था। जहां श्रद्धालूओ को बकरे की बलि चढ़ाने के लिए दो लाईन लगवाई गई थी। जिसमें सभी श्रद्धालू अपने अपने पाठा को लेकर कतारबद्ध होकर खड़े रहे। सुबह सात बजे से शुरू हुआ बलि का क्रम देर शाम तक चलता रहा। जिसमें श्रद्धालूओ की भीड़ को नियंत्रण करने के लिए शंभूगंज थाना के पुलिस पदाधिकारी व हरिबंशपुर गांव के पचास से भी ज्यादा ग्रामीण वोलंन्टीयर तैनात थे। बता दे कि तिलडीहा दुर्गा मंदिर में वर्ष 2010 के दशहरा में नवमी की रात्रि को बलि चढ़ाने के दौरान मची भगदड़ से दस श्रद्धालूओ का दबकर मौत हो गया था।

जबकि सैकड़ो से ज्यादा श्रद्धालू जख्मी हो गए थे। इस घटना में पांच दर्जन पाठा की भी दबकर मौत हो गया था। उस घटना के बाद तत्कालीन डीएम आदेश तितरमारे ने तिलडीहा दुर्गा मंदिर सहित बांका जिला के सभी मंदिरो में बकरे की बलि देने पर रोक लगा दिया था। लेकिन तत्कालीन सांसद पुतूल कुमारी के पहल पर तिलडीहा दुर्गा मंदिर में फिर बलि प्रथा शुरू कर दिया गया। लेकिन तिलडीहा दुर्गा मंदिर में बलि दाताओ की भीड़ कम करने के लिए मंदिर प्रशासन ने अब प्रति महीने एक तिथि निर्धारित कर बलि प्रथा तिलडीहा दुर्गा मंदिर में शुरू करा दिया है। जिससे दशहरा में अब अष्टमी से विजया दशमी तक में तीस हजार तक की बलि चढ़ाई जाती है। जबकि वर्ष 2010 के पूर्व चालीस हजार से भी ज्यादा पाठा की बलि चढ़ाई जाती थी। बता दे कि तिलडीहा दुर्गा मंदिर की स्थापना बंगाल राज्य के दरिया शांन्तिपुर जिले के दालपोसा गांव के हरवल्लव दास ने तांत्रिंक विधि से किया था। जहां की भक्ति में शक्ति को सुनकर बिहार,झारखंड, युपी,नेपाल,छत्तीशगढ़ जैसे राज्यो के कोने कोने से श्रद्धालू पुजा अर्चना करने पहुंचते है।

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