जानिए,ईश्वर भक्ति से विपत्ति की उत्पत्ति कैसे रोकना है संभव?

संवाददाता । मुजफ्फरपुर(बिहार)।

मनुष्य यदि समर्पण भाव से ईश्वर का भक्ति करें,तो उसके जीवन में कभी भी विपत्ति की उत्पत्ति नहीं होगी । भक्ति करने से दैहिक, दैविक ,भौतिक तीनों ताप से रक्षा होती है। यह तीनों ताप भगवान शिव के त्रिशूल में विद्यमान है। तभी तो मार्कंडेय ऋषि ने भगवान रूद्र के शरण में जाकर काल को भी परास्त किया था। उक्त बातें बुधवार को व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य जय कृष्ण शास्त्री ने कहा।


महायज्ञ के आठवे दिन यज्ञ स्थल स्थिति प।र्वती मंदिर में भगवान कार्तिकेय का मूर्ति स्थापित कर विद्वान पंडितो द्वारा प्राण प्रतिष्ठा कराया गया । वही शिव मंदिर में भगवान शिव का रुद्राभिषेक हुआ । रुद्राभिषेक में भारी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने भाग लिया ।
संध्या काल यज्ञ समिति द्वारा शिव मंदिर मे महाआरती का भी आयोजन किया गया । यज्ञ स्थल पर आठवें दिन बुधवार को भी हवन, कीर्तन, शिव स्तुति, राम धुन अनवरत जारी रहा ।


महायज्ञ समिति के सदस्य पूर्व मंत्री अजीत कुमार ने आगे के कार्यक्रमो की जानकारी देते हुए बताया कि गुरुवार को महायज्ञ के अंतिम दिन पूजा- पाठ के उपरांत 551 कन्याओं के लिए महाभोज का आयोजन किया गया है । वही संध्याकाल महा भंडारा होगा जिसमें 5000 से अधिक श्रद्धालुओं के लिए भोजन का व्यवस्था किया गया है। उन्होंने बताया कि महा यज्ञ पूर्णाहुति के बाद गुरुवार की रात्रि भजन संध्या का आयोजन किया गया है । जिसमें कई मशहूर कलाकार अपना कला प्रदर्शित करेंगे।


महायज्ञ आठवे दिन भी यज्ञ स्थल पर पूर्व की भांति श्रद्धालुओं का ताता लगा रहा। महायज्ञ समिति के सदस्य दामोदर चौधरी, मनमोहन सिंह ,रामसागर राय, रविंदर यादव, सीता राम साह, दिलीप राय, विश्वनाथ सिंह, लंबोदर झा, कन्हाई झा,शिव कुमार चौधरी, सुबोध कुमार सहित कई स्वयंसेवक श्रद्धालुओं के सेवा में लगे रहे।

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