व्यासपीठ से बोले कथावाचक,जहां शिव हैं वहां स्वर्ग है

संवाददाता ।मुजफ्फरपुर ।

जहां भगवान शिव है, वही स्वर्ग है। यदि व्यक्ति भक्ति भाव से शिव के शरण में जाकर उनका आराधना करे, तो उसे छूने से पहले काल भी सौ वार सोचता है । क्योंकि शिव स्वयं महाकाल है । महायज्ञ का प्रभाव आदि काल से इस भूतल पर है जब- जब देवी- देवता असुरों के आतंक से आतंकित हुए थे, तब तब यज्ञ से उन्हें परास्त किया जाता था । आज कमोबेश वही स्थिति इस भूतल पर बनती जा रही है । अनावृष्टि, अकाल ,आकस्मिक दुर्घटना,से लोग परेशान है ,वही प्रकृति ((जलवायु ) विमूख होती जा रही है । ऐसे में एक बार फिर महायज्ञ ऐसे विकट समस्याओं के समाधान के लिए इस भूतल पर नितांत आवश्यक हो गया है।


उक्त बातें सोमवार को मधुबन शिव मंदिर प्रांगण में हो रहे नौ दिवसीय रूद्र महायज्ञ के छठे दिन श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए अपने प्रवचन के माध्यम से आचार्य जय कृष्ण शास्त्री ने कहा। इस अवसर पर महायज्ञ में अखंड कीर्तन, हवन, राम धुन रासलीला, शिव स्तुति, भंडारा छठे दिन भी चलता रहा । वही महायज्ञ के प्रभाव से हो रहे लगातार बारिश से स्थानीय लोग काफी अहल्लादीत दिखे सभी इस बारिश के लिए भगवान शिव के प्रति आभार व्यक्त कर रहे थे।


भारी बारिश के बावजूद यज्ञ स्थल की व्यवस्था चाक-चौबंद था । श्रद्धालुओं को कोई कठिनाई नहीं हो जिसके लिए स्वयंसेवक काफी सक्रिय थे। यज्ञ समिति के सदस्य पूर्व मंत्री अजीत कुमार ने कहा कि इस महायज्ञ के प्रभाव से हमारे समाज में एक बड़ा परिवर्तन हुआ है ऊंच-नीच का खाई तो मीटा ही है समाज के सभी धर्मों के लोगों की भागीदारी एक बड़ा मिसाल बना है ।


यज्ञ स्थल पर आने वाले सभी श्रद्धालु भक्तों की खातिरदारी में यज्ञ समिति के सदस्य मनमोहन सिंह, शिव कुमार चौधरी, लखंदर राय, दामोदर चौधरी, अशोक पासवान, रविंदर यादव, कन्हाई झा, सीता राम साह, रामसागर राय, सँजीत चौधरी, कुंदन सिंह , गुडू महतो, आदि जी जान से लगे थे ।


इस महायज्ञ में पंडित लाल नारायण झा यजमान के रूप में तथा आचार्य पंडित लाल नारायण झा अपने सहयोगी विद्वान पंडितों के साथ आचार्य के रूप में अपनी महती भूमिका निभा रहे है।

a2znews