एक्सक्लूसिव:स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारियों के साथ धोखा,पहचान पत्र के बदले मांगा जा रहा रिश्वत!

 

अशोक वर्मा। मोतिहारी(बिहार)।

महात्मा गांधी चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष 2017-18 में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार ने जिले के अलावा राज्य एवं देश में लगातार आयोजन करके सेनानियों एवं उत्तरा धिकारियों की जमकर महिमा और प्रशंसा की। चंद बचे सेनानियों एवं उत्तराधिकारियों को ऐसा लगा कि सरकार हमारे लिए बहुत कुछ करने जा रही है।एक वर्ष के आयोजन का उद्घाटन विहार के तत्कालिन राज्यपाल महामहिम रामनाथ कोबिंद ने किया था।उस मौके पर सेनानियों एवं उत्तराधिकारियों को सम्मानित भी किया गया था।समापन पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से हुआ ।मोतिहारी मे देश भर से आये 20 हजार स्वच्छता सेनानियों को संबोधित कर स्वच्छता अभियान का शुभारंभ भी किया। अंतिम कार्यक्रम पर तत्कालिन केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह ,सांसद रमा देवी,विहार सरकार के मंत्री प्रमोद कुमार आदि ने सेनानियों एवं उत्तराधिकारियों को शाल ओढाकर सम्मानित किया था।


सेनानी एवं उत्तराधिकारियों का सम्मान कितना खोखला था यह बहुत जल्द उजागर हो गया।10 वर्ष पहले विहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने स्वतंत्रता सेनानियों के बेटा बेटी ,पोता पोती और नाती नतीनी को उत्तराधिकारी के रुप मे मान्यता देकर सभी जिला पदाधिकारीयों को इनका पहचान पत्र बनाने का आदेश निर्गत किया था।सचिवालय से इस बावत पत्र जारी होने के बाद पूर्वी चंपारण जिले से हजार से ज्यादा आवेदन उत्तराधिकारियों ने दिए,लेकिन समाहारणालय के कमीँ इस काम मे उपरी कमाई की संभावना न देख रुचि नहीं ली और सभी आवेदनो को रद्दी की टोकरी मे फेंक दिया।इस बीच स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन सक्रीय हुआ और नये सिरे से आवेदन संग्रह कर समाहारणालय के संबंधित विभाग मे जमा कराया।विभागीये जांच प्रतिवेदन, रिपोर्ट आदि आ जाने के बाद भी सभी आवेदन कार्यालयों मे धूल फांकते रहे।इस बीच चंद वर्ष पूर्व नीतीश कुमार ने स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों को नौकरी मे 2 % आरक्षण देकर लंबित आवेदकों से कमिँयों के लिए अवैध कमाई का रास्ता खोल दिया।सभी फाईलें दबा दी गई और जरूरतमंद मोटी रकम देकर पहचान पत्र निकालने लगे।चूकि आवेदन के साथ उत्तराधिकारियों को पहचानपत्र की प्रति लगाना अनिवार्य है,इसलिये पहचान पत्र देने मे कर्मियों कोअच्छी कमाई होने लगी।

संगठन के अध्यक्ष श्रीकिशोर पाण्डेय ने कई बार डी एम रमण कुमार से मिलकर हो रहे विलंब पर उनका ध्यान आकृष्ट किया,लेकिन कहीं से कोई राहत नही मिली।अध्यक्ष श्री पाण्डेय ने बताया कि सिर्फ पीपीओ, बंशावली और आधार काडँ सत्यापन के लिए काफी है,लेकिन परेशान करने वाला और रिश्वत को बढावा देने वाली प्रकृया को कर्मी छोड नहीं पा रहे है। सचिव राज किशोर शर्मा ने बताया कि सेनानी संगठन के प्रदेश नेतृत्व को मुख्यमंत्री ने उत्तराधिकारियों को पेंशन देने का आश्वासन दिया था,लेकिन पेंशन देना तो दुर अदना सा पहचान पत्र तक नहीं मिल पा रहा है।संगठन के प्रदेश नेता कौशल किशोर पाण्डेय ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर राजनीति करके सत्ता के शिर्ष पर पहुंच चूके राजनेता अपने लिए तो मासिक सेलरी और पेंशन की राशी मे बेतहासा वृद्धि कर दे रहे हैं,लेकिन जिनके पूवँज आजादी की लडाई मे सबकुछ न्योच्छावर कर दिये उनके वंशजो को हीं भूल गये।संगठन पुरे देश मे सभी सेनानी उत्तराधिकारी को एकजूट कर रहा है ,फिर एक बडा आंदोलन आरंभ होगा और राजनेताओं के वास्तविक रूप को बेनकाब किया जायेगा।विधान सभा चुनाव मे भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने झूठे वायदे का घाटा उठाना पडेगा।अगर जल्द से जल्द पहचान पत्र नहीं दिया गया और उततराधिकारी पेंशन नहीं लागू किया गया तो संगठन इनके विरोध मे पुरे विहार मे सभा कर इनको बेनकाब करेगा और विरोध अभियान विधान सभा चुनाव मे भी जारी रहेगा।

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