पड़ोसी व गरीबों के दुःख-दर्द को समझने और साथ देने की सीख देता है रमज़ान

 

*मानवता का पाठ पढ़ाने वाला महीना है रमज़ान

*गरीब,लाचार इंसान की दुःख-दर्द को समझने व मदद करने का महीना है रमज़ान

*रमज़ानुल मुबारक के महीने में खोल दिये जाते हैं जन्नत के दरवाजे

*इस्लामिक तरीके से जमे रुपयों/पैसों को साफ-सुथरा करने का है महीना

*इसी महीने के 05 सबेक़दर की रात में कुरआन धरती पर उतारी गई

*दिन और रात इबादत करने का महीना है रमज़ान

*एक इबादत व एक अच्छे कामो की मिलती है 70 गुने नेकी

मो.अंजुम आलम,जमुई (बिहार)।

रमज़ानुल मुबारक के महीने का इस्लामिक 12 महीनों में इसका एक अलग महत्व है।इंसान इस महीने में रोजे रखते हैं भूखे-प्यासे रह कर अल्लाह की इबादत करते है।सिर्फ भूखा-प्यासा ही नहीं बल्कि रोजे के दौरान हर बुराई व गलत कामो को छोड़कर इंसान साफ-सुथरा बन जाता है।आंख,नाक, कान,मुंह व पूरे जिस्म का रोजा इस महीने में रखा जाता है।रोजे की हालत में खाने-पीने के अलावा सारी एक इंसान की सारी इच्छाओं पर कड़ी पावंदी होती है।रोज़ हर बालिग मर्द और औरत पर फ़र्ज़ है।यह महीना पड़ोसियों की मदद करना,गरीब,मज़बूर और भूखों को खाना खिलाना अथवा उसके दुःख-सुख में साथ देने की सीख देता है।

इस महीने में खत्म हो जाती है इंसान की बुराइयां:

मौलाना नसीम इकबाल नदवी ने बताया कि रमज़ानुल मुबारक का महीना वह महीना है जो मानवता का पाठ पढ़ाता है।गरीब,लाचार इंसान के दुःख-दर्द को समझने व मदद करने का महीना है।इस महीने में इबादत से इंसान की सारी गुनाहों को माफ कर दी जाती है,इंसान पाक-साफ होता है।इस महीने में अल्लाह के रहमतों की बारिश होती है।इस महीने में इंसान के इबादतों के बदले में 70 गुना नेकी दी जाती है।इस महीने को तीन अशरा यानी तीन दहाई में बांटा गया है।पहला अशरा/दहाई यानी 01 से 10 रमज़ान तक रहमत का महीना यानी रहमतों की बारिश होती है।दूसरा 11 से 20 रमज़ान यानी मगफिरत का महीना जिसमें इबादत से इंसान की सारी गुनाह माफ कर दी जाती है और तीसरा अशरा जहन्नम से निजात पाने की है।आगे उन्होंने बताया कि यह महीना दिन और रात इबादत कर के अल्लाह को राजी करने का महीना है।

रमज़ान के महीने में नाज़िल(उतारना) हुई कुरआन:

मौलाना नसीम इकबाल नदवी ने बताया कि आसमानी किताब कुरआन रमज़ानुल मुबारक के महीने में धरती पर उतारी गई।इस महीने में पांच सबेक़दर की रात होती है।उस रात की क्या अहमियत होगी जिस रात की तारीफ खुद अल्लाह ने कुरआन में किया हो।कुरआन ने कहा पाँच सबेक़दर की रातों में से एक सबेक़दर की रात हज़ार महीनों से बेहतर है।और ये पांच रातों में से एक रात वो रात है जिसमें कुरआन नाजिल हुई/उतारा गया।आगे उन्होंने बताया कि कुरआन की पहली आयत यानी स्लोक 06 अगस्त 611 ई.को हुजूर मोहम्मद सल्लाहो अलैहे वसल्लम पर अल्लाह के फरिश्ते/दूत जिब्राईल अलैहिस्सलाम द्वारा उतारी गई थी।

23 वर्षों में धरती पर उतारी गई पूरी कुरआन:

जैसे-जैसे हालात पैदा होते गई वैसे-वैसे कुरआन की आयत यानी स्लोक फरिश्ते द्वारा मुहम्मद सल्लाहो अलैहे वसल्लम पर उतारी गई।और 23 वर्षों में पूरी कुरान धरती पर आई।उन्होंने बताया कि यह आसमानी किताब पूरी इंसानियत के लिए हिदायत यानी गाईड/सही मार्ग दिखाने वाला है।कुरआन के बाद अब कोई दूसरा आसमानी किताब नहीं आने वाला यह किताब जबतक दुनिया है तबतक कायम रहेगी।बताते चलें कि इससे पहले भी तीन पैगम्बर पर 03 आसमानी किताब तौरेत,इंजील और जबूर उतारे गए थे।लेकिन सभी किताबों में फेर-बदल कर दी गई थी इस लिए अंतिम नबी मुहम्मद सल्लाहो अलैहे वसल्लम पर कुरआन उतारा गया।जिसमें जर्रा के बराबर भी शक नहीं है।अल्लाह ने कुरआन में फरमाया की इस किताब में फेर-बदल करना तो दूर पूरी दुनिया में कोई भी इंसान इस किताब के एक नुख्ता यानी बिंदु को नहीं बदल सकता।

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