स्पॉट स्टोरी: कोई हारे कोई जीते अपना हाथ जगन्नाथ!

संवाददाता। सकरा,मुजफ्फरपुर।

सकरा के बाजीबुजूर्ग पंचायत के बाजीपूल से करीब दो सौ गज दूर पर स्थित महादलित का दो परिवार करीब १६ वोट का मालीक लोकतंञ के इस पर्व मे डूबकी लगाकर घर के काम को करने के बाद पापी पेट के खातीर सपरिवार मेहनत मे जूटा है । जितने लोग उतना ही काम टोकरी बिन्ने के लिए परिवार के सभी लोग सीता देवी का हाथ बटाते है ।

वे खुश है कि उसके सुख दूख मे परिवार के सभी लोगो की अहम भागेदारी होती है ।वोट देकर तो आ गयी लेकिन उसे मलाल है कि जो लोग चुनाव मे खडे है उसे भला वे लोग जानते तक नही ।कभी वोट मॉगने के लिए घर तक आते तो उनकी दिल की हसरत पुरी हो जाती ।सीता कहती है कि कोई जीते कोई हारे बाबू अपना हाथ जगन्नाथ है ।मेहनत नही करेंगे तो भर पेट भोजन नसीब नही होता ।अपनेवबच्चो को सरकारी विधालय मे पठाती है लेकिन उसे मलाल है कि वह अपने बच्चो को बेहतर शिझा नही दे पा रही है ।छट्टू मल्लीक ,मनीष मल्लीक व प्रेम मल्लीक का कहना है कि हम लोगो को पठाई के साथ साथ पुसतैनी काम को करना पडता है ।अगर काम नही करेंगे तो खाना मुअश्शर नही हो सकेगा ।

भरपेट भोजन व अच्छी शिझा के लिए पैसा जरूरी है ।लेकिन महादलित परिवारो की स्थिति यह है कि घर के चारो तरफ गंदगी का अंबार मानो वर्षो हो गये साफ सफाई के ।सुद्ध जल का संकट मानो नल जल योजना को मूह चीठा रही हो ।गंदे व फटे पुराने कपडो मे तन को लपेटे मानो गरीबी से लडाई चल रही हो । सकरा किसी की बने लेकिन महादलित का यह परिवार गरीबी से जंग लर रहा है ।

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