तब और अब:बोले स्वतंत्रता सेनानी,भारतीय लोकतंत्र की राजनीतिक में नैतिक व संस्कृति का हो गया पतन

कुमार सुबोध सिंह। शंभुगंज।

भारतीय लोकतंत्र की राजनीतिक में वर्तमान समय में नैतिकता व संस्कृति का पतन हो गया है । पूर्व में राष्टभक्ति व देश भक्ति की राग में राष्ट धर्म की राजनीतिक होती थी । जिसका हर दल के लोग मर्यादा व सम्मान के साथ पालन करते थे । लेकिन आज के इस वर्तमान समय में नेता अपनी अपनी पार्टी के लिए स्वभिमान की लड़ाई लड़ते है । सिद्धांतो की लड़ाई लड़ते है । उन्हे देश व भारत की मर्यादा व राष्ट शक्ति से कोई लेना देना नही रह गया है । उक्त बाते 92 वर्षीय समाजिक कार्यकर्ता व स्वतंत्रता सेनानी शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र के बरौथा गांव के धीरेन्द्र यादव ने कही । उन्होने कहा कि इससे तो बेहतर गुलाम भारत था । जिस समय आजादी को छोड़कर हमारे रणबाकुरे आजादी के दिवाने सेनानियो के पास सब कुछ था । चाहे राष्ट धर्म की बात हो या देश हित की बात है । हम सभी भारतीय हमेशा राष्ट्र के सेवा देश के सेवा के प्रति समर्पित होकर एक भावना रखते थे । धीरेन्द्र यादव ने बताया कि 26 जनवरी 1943 का वह दिन और टामी का क्रुरतापन चेहरा आज भी आंखो में बसे है जब गांव व घरो में तिरंगा झंडा फहराने के बाद आजादी के दिवाने सेनानियो को खोज खोजकर कोड़े व हंटर बरसाया गया था । इतना ही नही धीरेन्द्र यादव के एक पालतू सुग्गा जो बिलकुल इंसान की आवाज में बोलता था अंग्रेज टामी को देखकर इनक्लाब जिंन्दावाद का रट लगाने पर क्रुर टामी ने उस पक्षी को भी जलते चुल्हा में पिजड़ा को रखकर जला कर मार दिया था ।

उस समय अंग्रेजो से लड़कर भारत को गुलामी की जंजीर से मुक्ति दिलाने के बाद अब लग रहा है कि इससे तो भला गुलाम भारत था । जिस वक्त आजादी को छोड़कर सब कुछ था । 1956 में पहला चुनाव में खादी के चादर पर जमीन पर बैठकर गांव गांव में पैदल प्रचार करते थे । उस भुंजा खाकर और प्रचार में मतदाताओ से भी चंदा लेते थे और आज मतदाताओ को व्यवसाय का कुंडा बना लिया है । वोट के सौदागर वोटरो की कीमत लगाने से बाज नही आ रहे है । पूर्व में देश पर जब जब विदेशो ताकतो ने हमला किया हमारा सेना व सभी पार्टी दल के नेता देश हित में राष्ट्र धर्म का पालन कर मुंह तोड़ जबाब देने का काम किया  और आज का वर्तमान हालात आपलोगो के सामने है । उन्होने बताया कि वो लोहिया और जयप्रकाश के साथी है । जिनके सिद्धांतो पर चलना और समाज को भी उसी सिद्धांतो पर चलाने के लिए प्रेरणा देने का काम कर रहे है । लेकिन वर्तमान समय में अब उनके जैसा सिद्धांत वादी लोगो का राजनीति में मर्यादा कहा । अब तो पैसो वाला व चमचो बिचौलिए के लिए जगह मात्र बचा है । जहाँ लोग पैसे के बल पर टिकट खरीदकर चुनाव लड़ने का काम करते है ।

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