जानिए,भगवान का आगवन कब और क्यों होता है?

 

संवाददाता । बंदरा (मुजफ्फरपुर)।

प्रखंड क्षेत्र के बरियारपुर मोहनपुर स्थित शिवशक्ति धाम मंदिर के प्रांगण मे संगीतमय रामकथा के नौवें दिवस कथावाचिका मानस मर्मज्ञ नारायणी तिवारी ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि भगवान का आगमन सदैव धर्म की रक्षा के लिए हुआ है। रामायण हमें समाज के संस्कार,अच्छे-बुरे की पहचान सिखाता है।सच्ची भक्ति से ही भगवान की प्राप्ति की जा सकती है। नारायणी तिवारी जी के मुखार्विन्द द्वारा श्रोताओं को भगवान श्रीराम के चरित्र प्रसंग सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। भगवान राम रुपी झंडा देश में फहराने में उनके भाइयों का कम योगदान नहीं है। लक्ष्मण रूपी डंडा व भरत शत्रुधन रुपी पीलर धरती ने मिलकर यह कार्य किया। जिसके चलते भगवान श्रीराम की पूरे विश्व में श्रद्धा से पूजा होती है। उन्होंने उपस्थित माताओं व पिता समान अभिभावकों को सचेष्ट करते हुए कहा कि संस्कार की शिक्षा आज बच्चों में देने की आवश्यकता है। नहीं तो संस्कृति नहीं बचेगी। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा का केवल दस प्रतिशत भक्त अपने जीवन में उतार ले तो उसे कोई भी मार्ग कष्टकारी नहीं होगा।

उन्होंने संगीतमय ढंग से प्रवचनों और भजनों की अमृतवर्षा से संगतों को निहाल किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक बुराइयों ने मनुष्य को बुरी तरह से जकड़कर रखा हुआ है। आज भाई सगे भाई से, बेटा बाप से तो पति-पत्नी आपस में लड़ रहे हैं।

हम अपने दुखों से इतने दुखी नहीं होते जितना दूसरों के सुखों को देखकर होते हैं। इसलिए सुख के समय भगवान का स्मरण जरूर करना चाहिए, क्योंकि सुख के समय भगवान का गुणगान किया जाए तो हमें दुख भी नहीं आएगा। सुश्री तिवारी जी ने रामकथा मे भोजन करने और कराने की पद्धति जनक जी सिखाई कैसे भोजन किया जाता है। विवाह के बाद मिथिला मे दाल भात खिलाया गया मिलन के मधुर माहौल मे भोजन भी ऐसे किया जाये जो मिलाकर होता है इससे प्रेम बढता है । उन्होंने अपने मनमोहक भजनों से संगत को नाचने और झूमने पर विवश कर दिया और भगवान राम के जयकारों से वातावरण राममय बन गया। इस मौके पर धर्मादा कमिटी के अध्यक्ष विमल कुमार सिंह उपाध्यक्ष कौशल किशोर ठाकुर मुख्य यजमान डा विश्वजीत कुमार सिंह,अनुरागणी सिंह,राजीव सिंह,मनीष सिंह,विमलेश सिंह,रत्नेश कुमार सिंह,सीताराम सिंह,नारायण गिरी,कुंदन ठाकुर,बैजू झा,रमेश ठाकुर समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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