एक्सक्लूसिव:बिहार में है दुनिया का पहला मंदिर,जिसमें की जाती है शिवलिंग और मज़ार की एक साथ पूजा!Liveरिपोर्ट!

 

दीपक कुमार तिवारी।समस्तीपुर(बिहार)।

बिहार के समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 17 किमी दक्षिण-पश्चिम में मोरवा प्रखंड मुख्यालय से लगभग 500 मीटर की दूरी पर अवस्थित हैं खुदनेश्वर धाम। यह सामाजिक सौहार्द एवं साम्प्रदायिक एकता का अनुपम स्थल है। यहां बाबा खुदनेश्वर के शिवलिंग एवं खुदनी बीबी के मजार की पूजा अर्चना श्रद्धा एवं विश्वास के साथ की जाती है। यह स्थल अपने आप में अद्वितीय है।
प्राचीन किंवदन्ती है कि सात सौ वर्ष पूर्व यहां घनघोर जंगल था जहां आस पास के लोग मवेशी चराया करते थे। वहीं मुस्लिम बाला खुदनी बीबी अक्सर गाय चराया करती थी। परन्तु, शाम के समय गाय के थन से दूध नहीं निकलता था। इस पर परिवार वालों को आश्चर्य हुआ।

एक दिन गाय चराने के क्रम में खुदनी ने देखा कि गाय एक झुरमुट में खड़ी है तथा उसके थन से अपने आप एक निश्चित स्थान पर दूध गिर रहा है। यह देख उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। इस घटना को जब लोगों ने सुना तो उस स्थल पर खुदाई की गई। जहां भव्य शिवलिंग दिखाई पड़ा। खुदाई के क्रम में कुदाल लगने से शिवलिंग का उपरी भाग कट गया जो साक्ष्य के रूप में आज भी देखा जा सकता है। खुदनी बीबी के मरणोपरान्त शिव के स्वप्न के मुताबिक शिवलिंग के बगल में मात्र डेढ़ गज की दूरी पर उन्हें दफनाया गया। उन्हीं के नाम पर इस स्थल का नामकरण खुदनेश्वर स्थान पड़ा।

ब्रिटिश समय में नरहन स्टेट ने 1858 में एक मंदिर का निर्माण कराया। जिसकी देख-रेख के लिए पुजारी भी नियुक्त किया गया। कालान्तर में मंदिर की जीर्ण-शीर्ण अवस्था को देख आपसी सहयोग से भव्य मंदिर का निर्माण प्रारंभ किया गया। निर्माण के क्रम में 2008 में बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष किशोर कुणाल का ध्यान आकर्षित कराया गया। न्यास बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा स्थल निरीक्षण के उपरान्त पंजीकरण के साथ आर्थिक सहायता करते हुए पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की गई। इस धाम का पंजीयन संख्या- ”3783 श्री शिव मंदिर खुदनेश्वर धाम” मोरवा है।

यह है आवागमन की व्यवस्था:

समस्तीपुर जिला मुख्यालय से बस के द्वारा दक्षिण-पश्चिम में 15 किमी पर गंगापुर चौक है। वहां से लगभग 2 किमी दक्षिण खुदनेश्वर धाम अवस्थित है। ताजपुर चौक से 5 किमी दक्षिण-पूर्व की ओर खुदनेश्वर धाम अवस्थित है जहां से निजी वाहन के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। मंदिर के दक्षिण दिशा में मात्र 5 किमी की दूरी पर एनएच 103 पर सरैया चौक है, जहां से निजी वाहन द्वारा धाम तक पहुंचा जा सकता है।वैसे तो यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, परन्तु पूरे सावन, शिव पंचमी एवं महा शिवरात्रि के अवसर पर भारी मेला का भव्य आयोजन होता है। इस अवसर पर आस-पास का क्षेत्र भक्ति रस में सराबोर रहता है, तथा हर-हर बम-बम के मत्रोच्चार से दिशाएं निनादित हो उठती हैं।

पर्यटन स्थल बनने से होगा यह लाभ:

पर्यटन स्थल बनने से यहां करीब 50 हजार नया रोजगार सृजित हो सकता है। जिससे सरकार को भी राजस्व का अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो सकता है। साथ हीं इस क्षेत्र के लोग काफी खुशहाल होंगे।

जलाभिषेक व पूजन दर्शन का समय सारणी:-

श्रावणी मेला में भक्तों एवं कावरियों के लिए जलाभिषेक व पूजन दर्शन का समय सुबह 03:45 बजे से दिन के 12:00 बजे तक फिर दिन के 12:15 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक।

भक्तों के लिए विशेष व्यवस्था:-

श्रावण मास में खुदनेश्वर धाम मंदिर समिति की ओर से भक्तों को आराम करने के लिए अलग से पंडाल की व्यवस्था की गई है। साथ ही 24 घंटे बिजली के लिए जेनरेटर की व्यवस्था भी की गई है।

बता दें कि देश का यह पहला मंदिर है जहां हिन्दू मुस्लिम एकता का नायाब नमूना देखने को मिलता है। एक ही छत के नीचे शिवलिंग एवं मजार दोनों अवस्थित है।

व्यवस्थापक दिनेश्वर झा का कहना है कि सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालुओं की समस्या पर मंदिर न्यास समिति के सदस्यों द्वारा काबू पाने के प्रयास तो किये जाते हैं। लेकिन व्यवस्थाएं छोटी पड़ जाती है। इस मंदिर की प्रसिद्धि जितनी दूर दूर तक फैली है उसके हिसाब से इसकों संरक्षण नहीं मिल पा रहा है।

पुजारी का कहना है कि यहां जितने श्रद्धालु आते हैं उनको सरकारी तौर से कोई सुविधा नहीं मिल पाता है। पुजारी का मानना है कि सावन के प्रत्येक सोमवारी को यहां 40 हजार बम जलाभिषेक करते है।

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