बन्दरा का दर्द:रतवारा-रैनी घाट पर पुल निर्माण बना है सपना!

दीपक कुमार तिवारी । मुज़फ्फरपुर/पटना(बिहार)।

मुज़फ्फरपुर जिले में बूढ़ी गंडक नदी के रतवारा-रैनी घाट पर अतिप्रतिक्षित पुल निर्माण का मामला बन्दरा में अबकी लोक चुनाव में चुनावी मुद्दा बन सकता है।बन्दरा प्रखण्ड के लोगों की मानें तो बूढी गण्डक नदी के उत्तरी इलाका बन्दरा आज भी विकास के दौर में अंतिम हासिये पर है। इसका कारण है आवागमन की असुविधा ।गायघाट विधानसभा के पूर्वी -उतरी क्षेत्र का यह क्षेत्र बंदरा प्रखंड का क्षेत्र है।

यह मुज़फ़्फ़रपुर एवं दरभंगा जिले का बोर्डर एरिया है।बताया जाता है कि बूढी गण्डक नदी के रतवारा-ढोली घाट पर पुल का निर्माण की मांग पिछले कई सालों से हो रही हैं।रतवारा में श्याम किशोर ने बताया कि पुल के अभाव में यहां अनंत समस्याएं हैं।

पुल बनते हीं यह स्वत:समाप्त हो जाएंगे और यहां के किसान, मजदूर, व्यवसायी और छात्र नौजवान के दिन बहुरने लगेंगे। इस घाट पर पुल के निर्माण के आस में कई पीढ़ियां गुजर गई किन्तु लोग आज भी निराश नही है ।इस मुद्दे पर कई बार आमरण अनशन भी हुआ कई सरकारें आई और गई किन्तु पुल का निर्माण नही हो सका।कृष्ण मोहन कुमार ने बताया कि बंदरा के लोग आंदोलन के लिए फिर एक बार कमर कस लिया है और इस बार आने वाले लोक सभा के चुनाव में यह मुद्दा प्रमुखता से छाये रहेगा।

जिस कारण राजनीतिक दलों का नफा नुकसान हो सकता है। मतलुपुर के रामकुमार त्रिवेदी ने बताया कि बंदरा के ग्रामीण एकजुट होकर आनंदोलन की तैयारी पूरी कर चुकी है और फरवरी मध्य से इसका आगाज हो सकता है।

रतवारा के किसान कृष्ण मोहन कुमार का कहना है कि पुल का निर्माण यदि सरकार नही करेगी तो इस बार प्रत्याशी को महंगा पड़ेगा।जनता वोट वहिष्कार करेगा।इसी गॉव के व्यवसायी कुंदन सेन का कहना है कि इस क्षेत्र के अनेक समस्याओं का एक मात्र निदान,पुल का निर्माण है।तेपरी के खेतिहर रामलखन सिंह पुल निर्माण के लिए दसकों से आस लगाए बैठे हैं।

मतलूपुर के किसान सीताराम प्रसाद कहते हैं कि इस बार के आंदोलन में फिर से भाग लेकर पुल की मांग को तेज करेंगे।बन्दरा प्रखण्ड के अलावे पड़ोसी गायघाट, कल्याणपुर एवं सिंहवाड़ा प्रखण्ड क्षेत्र के करीब 3 लाख स्थानीय एवं पड़ोसी क्षेत्र के लोगों को पुल निर्माण से राहत मिलेगी।जिला एवं राज्य मुख्यालय की दूरी काफी कम जायगी।

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