ब्रेकिंग:धर्म संसद में राम मंदिर बनाने पर बड़ा ऐलान, VHP की धर्म संसद में भागवत बोले:हिन्दुओं के खिलाफ षड्यंत्र

 

ब्यूरो । प्रयागराज(यूपी)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विश्व हिन्दू परिषद की धर्म संंसद में कहा कि आज हिन्दू समाज के विघटन के प्रयास किये जा रहे हैं। इसलिए धर्म जागरण के माध्यम से जो हिन्दू बन्धु हमसे बिछड़ गये हैं उनको वापस लाना और वापस ना जाने पाये इसके लिए प्रयास किये जाने की आवश्यकता है। सरसंघचालक ने कहा कि सबरीमाला हिन्दू समाज का संघर्ष है। वामपंथी सरकार न्यायपालिका के आदेशों के परे जा रही है।

वे छलपूर्वक कुछ गैर श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर ले गये हैं और जो अयप्पा भक्त हैं उनका दमन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने फैसला तो सुना दिया लेकिन इससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं एवं सम्मान आहत हुआ, इसका ख्याल नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि महिलाएं मंदिर में प्रवेश नहीं करना चाहती हैं लेकिन श्रीलंका से लाकर उनको पिछले दरवाजे से प्रवेश कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म को ठेस पहुंचाने की साजिश चल रही है।

भागवत ने कहा कि अयप्पा केवल केरल के हिन्दुओं के भगवान नहीं हैं। यह सभी हिन्दुओं के भगवान हैं। उन्होंने कहा, ”इस आंदोलन में पूरा हिन्दू समाज शामिल है। अयप्पा के भक्त हिन्दू समाज के सभी नागरिक हैं। संपूर्ण देश में हमें वस्तुस्थिति बताकर लोगों को जागरूक करना होगा। हिन्दुओं के खिलाफ षड्यंत्र चल रहा है। कहीं-कहीं षड्यंत्र चल जाता है, उसका कारण हमारी कमियां हैं। पंथ, भाषा, जात-पात के नाम पर कोई व्यक्ति हमें अलग नहीं कर सके। सामाजिक समरसता का काम शुरू होना चाहिए।

मोहन भागवत ने कहा कि हम अम्बेडकर के अनुयायी हैं। अम्बेडकर ने एक रहने की सलाह दी। आज हमको समझने के लिए उन्हें भगवा पहनना पड़ता है। विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय महामंत्री मिलिन्द परांडे ने कहा कि केरल सरकार हिन्दुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। जाति एवं भाषा के आधार पर गुजरात, महाराष्ट्र और असम में हिन्दू समाज को लड़ाने का प्रयास किया जा रहा है। योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि देश में समान नागरिक संहिता कानून तथा समान जनसंख्या का कानून लाना चाहिए।

योगी मिले भागवत से धर्म संसद से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार सुबह मोहन भागवत से मिले। प्रयागराज में वीएचपी की दो-दिवसीय धर्मसंसद में देशभर से ढाई हजार साधु संतों के शामिल होने की उम्मीद है।


विश्व हिंदू परिषद की धर्मसभा में राम मंदिर पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके अलावा नृत्यगोपाल दास समेत कई अन्य धार्मिक गुरु भी इसमें शामिल हो रहे हैं. गोरक्षा और गंगा पर भी मंथन होगा। वीएचपी की धर्मसंसद से पहले शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की अध्यक्षता में हुई परम धर्म संसद ने मामले को और तेज कर दिया है. परम धर्मसंसद ने प्रयागराज कुंभ से बुधवार को राम मंदिर बनाने का ऐलान किया और कहा कि 21 फरवरी को साधु संत इसका शिलान्यास करेंगे।

कल हुआ था परम धर्म संसद राम मंदिर को लेकर बड़ा ऐलान:
कुंभ में द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई में चली तीन दिवसीय परम धर्म संसद ने बुधवार को धर्मादेश जारी कर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए तारीख का ऐलान कर दिया. यह धर्मादेश प्रयागराज में ही विश्व हिंदू परिषद की अगुवाई में होने वाली धर्म संसद के एक दिन पहले आया है. वीएचपी की धर्म संसद से पहले जारी इस धर्मादेश से साधु-संतों के बीच राम मंदिर निर्माण को लेकर धर्मायुद्ध छिड़ने की संभावना है।

ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि बसंत पंचमी के बाद हिंदू समाज अयोध्या के लिए प्रस्थान करे, ऐसी मेरी अपील है. धर्मादेश में कहा गया, ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण में हिंदुओं की मनोकामना की पूर्ति के लिए यजुर्वेद, कृष्ण यजुर्वेद तथा शतपथ ब्राह्मण में बताए गए इष्टिका न्यास विधि सम्मत कराने के लिए 21 फरवरी, 2019 का शुभ मुहूर्त निकाला गया है।’


धर्मादेश में यह भी कहा गया कि, ‘इसके लिए यदि हमें गोली भी खानी पड़ी या जेल भी जाना पड़े तो उसके लिए हम तैयार हैं। यदि हमारे इस कार्य में सत्ता के तीन अंगों में से किसी के द्वारा अवरोध डाला गया तो ऐसी स्थिति में संपूर्ण हिंदू जनता को यह धर्मादेश जारी करते हैं कि जब तक श्री रामजन्मभूमि विवाद का निर्णय नहीं हो जाता अथवा हमें राम जन्मभूमि प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक प्रत्येक हिंदू का यह कर्तव्य होगा कि चार इष्टिकाओं को अयोध्या ले जाकर वेदोक्त इष्टिका न्यास पूजन करें।’
साथ ही साधू-संतों ने धर्मादेश में कहा, ‘न्यायपालिका की शीघ्र निर्णय की अपेक्षा धूमिल होते देख हमने विधायिका से अपेक्षा की और 27 नवंबर, 2018 को परम धर्मादेश जारी करते हुए भारत सरकार एवं भारत की संसद से अनुरोध किया था कि वे संविधान के अनुच्छेद 133 एवं 137 में अनुच्छेद 226 (3) के अनुसार एक नई कंडिका को संविधान संशोधन के माध्यम से प्रविष्ट कर उच्चतम न्यायालय को 4 सप्ताह में राम जन्मभूमि विवाद के निस्तारण के लिए बाध्य करें।

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