बोधगया में ढूंगेश्वरी पहाड़ी से महाबोधि मंदिर तक गूंजता रहा बुद्धम् शरणं गच्छामि का मंत्र

 

दीपक कुमार तिवारी । बोधगया(बिहार)।

बिहार के बोधगया में राजकुमार सिद्दार्थ की तपोस्थली ढूंगेश्वरी पहाड़ी की तलहटी से गुरुवार को महाबोधि मंदिर तक बुद्धम् शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि का मंत्र गूंजा। गुरुवार को तथागत के पदचिह्नों पर बौद्ध धर्मावलंबियों ने चलकर भगवान बुद्ध के ज्ञान पथ को जीवंत किया।

ज्ञान यात्रा में एक हजार बौद्ध भिक्षु व अन्य लोग शामिल हुए और दुनिया को बुद्ध के संदेशों का अहसास कराया। बौद्ध महोत्सव के पूर्व ढूंगेश्वरी पहाड़ी से महाबोधि मंदिर तक ऐतिहासिक ज्ञान पद यात्रा निकली। इसमें जापान, थाईलैंड, बांगलादेश, वियतनाम, तिब्बत, कम्बोडिया, कोरिया व म्यांमार के एक हजार बौद्ध भिक्षु तथा आमलोग शामिल हुए। सबों ने भगवान नौ किलोमीटर के इस ज्ञान पथ पर चलकर दुनिया को मानवता और भाईचारे का संदेश दिया। कड़ाके की ठंड में सुबह सात बजे ढूंगेश्वरी पहाड़ी से ज्ञान यात्रा निकली।

इस रास्ते में पड़ने वाले गांव के ग्रामीण और स्कूली छात्राओं ने यात्रा में शामिल लोगों का फूलों से स्वागत किया। ज्ञान यात्रा का आयोजन पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से किया था। जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस यात्रा में शामिल हुए। ढूंगेश्वरी से पैदल चलकर सुजाता गढ़ आये। वहां पर सब को खीर खिलाया गया। उसके बाद ज्ञान यात्रा महाबोधि मंदिर पहुंची।

वहां बोधिवृक्ष के नीचे वश्विशांति के लिए प्रार्थना की गयी। जिला प्रशासन की ओर से डीएम अभिषेक सिंह ने इसमें हिस्सा लिया। ढूंगेश्वरी गुफा में छह वर्ष कठिन तपस्या करने के बाद तथागत इसी रास्ते से चल कर बोधगया पहुंचे थे। बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह रास्ता महत्पूर्ण सांस्कृतिक विरासत है। यात्रा निकलने के पूर्व महायानी और थेरावादी बौद्ध भक्षिुओं ने शांति पाठ किया। ज्ञान यात्रा को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे।

इस यात्रा में बीटीएमसी के मुख्य पुजारी भंते चालिंदा, सचिव एन दोरजी, श्रीलंकाई बौद्धमठ के भंते होटल एसोसिएशन, स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए रास्ते में लोगों ने नीबू पानी और चाय की व्यवस्था की थी।

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