उपेंद्र-शरद 2019 चुनाव से पहले करेंगे पार्टियों का विलय!

 

संवाददाता । पटना/नई दिल्ली।

ख़बर है कि लोक समता पार्टी के चीफ उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) के साथ करने की तैयारी में है। पहचान छिपाए जाने की शर्त पर बिहार के दो नेताओं ने इस बारे में जानकारी दी। इन नेताओं के कहा कि इन दोनों पार्टियों का विलय होने पर बनी नई पार्टी अन्य पार्टियों से भी गठबंधन कर सकती है। इसके अलावा यह नई पार्टी प्रदेश के बाहर की पार्टियों से भी गठबंधन पर विचार कर सकती है।

उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए को अल्टीमेटम दिया था कि वह 30 नवंबर तक सीटों के बंटवारे पर फैसला करे लेकिन उन्हें अभी इस पर कोई जबाव नहीं मिला है। वहीं सूत्रों के अनुसार शरद यादव और उपेंद्र कुशवाहा इस विलय पर चर्चा कर चुके हैं और 6 दिसंबर के बाद कभी भी इसकी औपचारिक घोषणा भी की जा सकती है।

उपेंद्र कुशवाहा ने महाराष्ट्र के एक किसान नेता राजू शेट्टी से भी संपर्क किया है। शेट्टी ने इस बात की भी पुष्टि की है कि कुशवाहा ने 2019 चुनाव से पहले उनसे गठबंधन पर चर्चा की है। शेट्टी ने कहा कि हम दोनों ही एनडीए का हिस्सा रहे हैं। राजू शेट्टी स्वाभिमानी पक्ष की अगुवाई करते हैं। साल 2017 में किसानों के साथ धोखे का आरोप लगाते हुए उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन खत्म कर दिया था। शेट्टी ने आगे कहा कि कुशवाहा ने उनके सामने पार्टियों के किसी तरह के विलय का प्रस्ताव नहीं रखा है लेकिन आगामी चुनाव से पहले गठबंधन पर चर्चा की है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुशवाहा एनडीए में खुश नहीं हैं।
तीन दिवसीय राजनीतिक चिंतन शिविर के दूसरे दिन बुधवार को रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि पार्टी ने उन्हें एनडीए में रहने या ना रहने का फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया है। गुरुवार को मोतिहारी में वे बड़ी घोषणा करेंगे। यहीं से वे नीतीश सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए शंखनाद करेंगे। क्राइम, करप्शन व कम्युनलिज्म से कराह रही जनता को मुक्ति दिलाएंगे। बुधवार को राज्य कार्यकारिणी के साथ चिंतन शिविर के समापन के बाद संवाददाताओं से कहा कि यहां शिक्षा-स्वास्थ्य समेत सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो चुकी है। इसे फिर से लाने का उन्होंने संकल्प लिया है।

उन्होंने कहा कि डेढ़ साल से वह शिक्षा में सुधार के लिए आंदोलन चला रहे हैं। राज्यभर में घूम-घूमकर कार्यक्रम किए। गांधी मैदान में रैली की व सीएम को ज्ञापन के माध्यम से 25 सूत्री शिक्षा सुधार मांग रखी।

बावजूद शिक्षामंत्री ने कह दिया कि रालोसपा ने देर से शिक्षा का मुद्दा उठाया। इससे लगता है कि शिक्षा सुधार के लिए राज्य सरकार कुछ नहीं करने जा रही है। वे मांग माने जाने पर सीट शेयरिंग की बात भी छोड़ने के लिए राजी हो गए। उन्होंने कहा कि मेरा गठबंधन भाजपा और लोजपा के साथ था। जदयू से कभी भी मेरा गठबंधन न था, ना है और न रहेगा। उन्होंने राज्य सरकार को शिक्षा व स्वास्थ्य के मुद्दे पर बहस की चुनौती भी दे डाली।

मंदिर के बहाने भाजपा पर प्रहार:

उपेंद्र कुशवाहा ने भाजपा को जदयू की बी टीम करार दिया। बिना नाम लिए कहा कि देश की सबसे बड़ी पार्टी चुनाव के समय राम मंदिर का मुद्दा उछाल रही है। राम मंदिर राजनीतिक मुद्दा नहीं है। मंदिर जिसे बनाना है, वे बनाएं। लेकिन चुनाव को देखते हुए एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी धार्मिक उन्माद फैलाना चाह रही है। यह समय जनता के मौलिक सवालों के जवाब देने का है। कुशवाहा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर भी भड़के। कहा कि ये वही लोग हैं जो नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री नहीं बनना देना चाहते थे। नीतीश कुमार के वे पिछलग्गू हैं।

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