-बन्दरा में जलजमाव की समस्याओं ने किसानों को ‘भाग्य’ पर टिकाया,आगात फसलों पर संकट
बन्दरा। दीपक कुमार तिवारी।
कभी बाढ़ की तबाही तो कभी जल निकासी की समस्या तो कभी जलजमाव के कारण से उत्पन्न होती है समस्या। और इस कारणों से प्रखंड क्षेत्र के किसान तबाह होते रहते हैं। प्रखंड एवं आसपास क्षेत्र में जलजमाव की समस्या कई सालों से चली आ रही है,बाबजूद इस पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों या पदाधिकारीयों का ध्यान इस बातों पर केंद्रित नहीं हो सका है। लिहाजा प्रखंड एवं आसपास के क्षेत्रों के सैंकड़ों किसान इस समस्या से प्रत्येक साल जूझ रहे हैं और समसामयिक खेती इन कारणों से इलाके में प्रभावित हो रहे हैं। अनुमानतः करीब 4000 एकड़ में जलजमाव की वजह से समसामयिक खेती में काफी देर हो जाती है। रबी फसलों की बुवाई में भी काफी देर हो जाती है। जलजमाव की समस्या वाले क्षेत्रों में प्रखंड क्षेत्र का हत्था, मुन्नी बैंगरी,पटसारा,तेपरी बन्दरा,मतलुपुर,नूनफ़ारा,बड़गांव पंचायत क्षेत्र का हिस्सा ज्यादा प्रभावित होता है, वही कम या ज्यादा इस तरह की समस्या बाकी पंचायतों में भी किसानों को झेलनी पड़ती है। बंदरा प्रखंड प्रमुख सोनी चौधरी ने बताया कि इस समस्या से प्रखंड क्षेत्र के किसान परेशान हैं,लेकिन इसका निदान उनके हाथों में नहीं है। पंचायत समिति की बैठक में जलजमाव से निदान को लेकर प्रस्ताव लिए जाएंगे,लेकिन इसका निदान वरीय प्रतिनिधियों के पहल पर हीं सम्भव है। मुन्नी-बैंगरी पंचायत के मुखिया दीपक कुमार चौधरी ने बताया कि जलजमाव की समस्या से मुन्नी बैंगरी पंचायत सहित आसपास के कई पंचायत प्रभावित होते हैं। यदि सालाना बागमती नदी के बाढ़ का पानी आता है तो जितना तेजी से बाढ़ का पानी फैलता है,उतना ही काफी धीमी गति से पानी निकलते-निकलते रुक जाता है।तब किसानों को पानी सूखने का इंतज़ार करना पड़ता है।इसमें 3 से 4 महीने लग जाते हैं। इस बीच यदि बरसात लगातार होते रहे तो यह जलजमाव ‘दाद में खाज’ का काम करता है और जलजमाव की समस्या एक दो महीने और बढ़ जाती है।

जलजमाव से मुक्ति एवं जलनिकासी की व्यवस्था हो तो यहां सबसे अगात फसलें होंगी:
मुखिया ने बताया कि बाढ़ इस बार नहीं भी आया है तो बरसात की वजह से इलाके में जलजमाव उत्पन्न हो गई थी जो समय से नहीं निकल पाया और रबी फसलों की बुवाई में काफी देर हो गई है। यदि खेतों में लगा जलजमाव समय से हट जाता तो फसलों की बुवाई काफी पहले से हीं यहां शुरू हो जाती।सकरी में वरीय समाजसेवी कृष्ण कुमार तिवारी ने बताया कि बंदरा प्रखंड के पूर्वी क्षेत्रों में किसी भी मौसम की फसलें अगात रूप से बुवाई की जाती है। लिहाजा इधर अगात फसलें बोई और काटी जाती है,लेकिन जलजमाव की वजह से किसानों के फसल बुवाई पर संकट उत्पन्न हो जाता है।

समस्या एक हीं नहीं कई,कोई विकल्प भी नहीं:
पटसारा मुखिया रविंद्र सहनी ने बताया कि यदि इलाके में जलजमाव भी नियमित तथा कंट्रोल में रहे तो पोखर आदि बनवाकर मछली पालन एवं जलजनित उत्पादन भी कराए जा सकते हैं,लेकिन असामयिक एवं अत्यधिक जलजमाव या बाढ़ के पानी के फैलाव की वजह से मछली पालन सहित जलजनित उत्पादन भी संभव नहीं हो पाता है। पोखर में मछली डालने पर जलजमाव या बाढ़ के पानी में पोखर में पली-बढ़ी मछलियां बह जाते हैं। ऐसे में पिछात खेती ही एकमात्र विकल्प बचता है। हत्था में किसान गुड्डू मिश्रा ने बताया कि जलजमाव की वजह से ना समय से फसल हो पाती है न मछली पालन संभव होता हो पाता है। कई बार चाह कर भी वे लोग इलाके में वृक्षारोपण भी नहीं कर पाते हैं। इलाके में वृक्ष आदि लगाए भी जाते हैं तो बाढ़ के पानी में या जलजमाव के चपेट में आने से सूख जाता है। हरा भरा पेड़ भी सूख कर बर्बाद हो जाता है। ऐसे में इलाके के किसान संकट में हैं। किसानों ने बताया कि दक्षिण में बूढ़ी गंडक नदी तथा उत्तर में बागमती नदी के बीच में बसा हुआ बन्दरा प्रखंड क्षेत्र का यह इलाका है। ऊपर से मुजफ्फरपुर जिले का यह अंतिम बॉर्डर क्षेत्र पर बसा हुआ है। इन कारणों से यह इलाका उपेक्षित एवं पिछड़ा हुआ है। चाह कर भी हम किसानों की तरक्की नहीं हो पाती है।कभी प्राकृतिक तो कभी सरकारी पदाधिकारियों,सिस्टम तथा जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार होते हैं। लिहाजा कर्म से ज्यादा किस्मत के भरोसे किसानों की जिंदगी इस इलाके में कट रही है।चाह कर भी बहुत अच्छा उत्पादन या वैज्ञानिक अथवा व्यवसायिक खेती की बात किसान नहीं सोच सकते हैं।जिला कृषि अधिकारी शिलाजीत सिंह भी कई बार किसानों की संगोष्टी में व्यवसायिक खेती की नशीहत देते रहे हैं,लेकिन हौसला भी बढ़ता है,लेकिन भौगोलिक एवं तकनीकी कारणों से यह बेमानी लगती है।चांदपुरा में हत्था पैक्सध्यक्ष नंद किशोर द्विवेदी ने बताया कि कुछ ऊंचे स्थलों पर पेड़ पौधे लगते भी हैं तो बाढ़- बरसात की वजह सूखकर बेकार हो जाते हैं।
ऐसे हो सकता है समस्या का समाधान:
किसानों ने बताया कि सकरी मन की मृत उपधारा की उड़ाही के अलावे पुरानी बागमती नदी के मुन्नी चौर से सकरी मन तथा तेपरी चौर से सखौरा के रास्ते सकरी मन, तथा बन्दरा,मतलुपुर से पटसारा चौर के रास्ते सकरी मन,नहर तथा मुन्नी- खनुआ-कल्याणनगर में बागमती की पुरानी धारा के उड़ाही कर पुनर्जीवित करने से जलजमाव की समस्या से बहुत हद तक राहत मिलना संभव है । लेकिन यह विधायक एवं सांसद स्तर की बात है और इस पर कभी इन लोगों ने ध्यान नहीं दिया है।क्योंकि यह जटिल और बड़ा प्रोजेक्ट है।
बोले विधायक:
इस मामले में गायघाट विधायक निरंजन राय ने बताया कि जलजमाव की समस्या से बन्दरा प्रखंड क्षेत्र का बहुत बड़ा इलाका प्रभावित है। इसके निदान के लिए विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को लिखकर आवश्यक पहल करने की मांग करेंगे।














