कहते हैं संगीत में सात सुर होते हैं आठवां सुर कभी कभार ही लग पाया है । साल था 1990 का डेविड धवन 1960 के दशक की बंगाली फिल्म ” जोग वियोग” का रीमेक लेकर बॉलीवुड में आए थे फिल्म का नाम था ” स्वर्ग “!
दशकों बाद इस फिल्म के एक गीत में आठवां सुर लगा था गीत था ” ए मेरे दोस्त लौट कर आजा बिन तेरे जिंदगी अधूरी हैं ” इस गीत को गाने वाले गायक का नाम था मोहम्मद अज़ीज़!

मोहम्मद अज़ीज़ ने कभी कहीं गायकी नहीं सीखी थी जो कुछ था वो उपर वाले का आशीर्वाद था इन पर। उड़िया फिल्मों से होते हुए 1984 में बॉलीवुड में इनको अम्बर फिल्म में गाने का मौका मिला। गाना और फिल्म दोनो गुमनाम रहे इसलिए किसी ने नोटिस नहीं किया। उस साल मनमोहन देसाई एक हाई बजट की फिल्म बना रहे थे उस फिल्म के लिए संगीतकार के रूप में अनु मलिक को साइन कर लिया था। अनु मालिक को रास्ते में एक गाने की बहुत ही यूनिक आवाज सुनाई दी. पता लगाने पर उस गाने में आवाज देने वाले गायक थे मोहम्मद अज़ीज़। यही से वो मीम वाला कॉन्टेंट निकला ” सड़क से उठा कर स्टार बना दूंगा ” अनु मालिक ने इनको उस फिल्म में गाने को मौका दिया। जिस नायक पर गाना था वो कोई मामूली नायक नहीं बल्कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन थे। फिल्म का नाम था मर्द और गाना था ” मर्द टांगे वाला हूं मैं मर्द टांगे वाला ” उस दौर में इस गाने ने धूम मचा दी। गांव कस्बों में उस दौर में टांगें चला करते थे और उनके बीच ये गाना काफी मशहूर हुआ। गरीब गुरगा ही टांगा चलाने वाला होता हैं राजनीतिक शब्दो में कहे तो समाज का अंतिम व्यक्ति। तो मोहम्मद अज़ीज़ की आवाज समाज के एलीट वर्ग से होती हुई अंतिम व्यक्ति तक पहुंच चुकी थी।
इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अमिताभ बच्चन,अनिल कपूर,जैकी श्रॉफ,सनी देओल के लिए 90s में दर्जनों सुपरहिट गाने गाए इन्होंने। कुमार सानू और उदित नारायण के दौर में अभिजीत और सोनू निगम जैसे वर्सेटाइल सिंगर्स कुछ मौकों पर स्ट्रगल करते थे लेकिन इन्हे काम मिलता रहा रेगुलर। फिर एक इंटरव्यू ने इनका सिंगिंग करियर बर्बाद कर दिया।
सूफी गायकों को लेकर मोहम्मद अज़ीज़ से एक पत्रकार ने नुसरत फतेह अली खान से जुड़ा प्रश्न पूछ लिया। बदले में इन्होंने बडे़ शख्त शब्दो में नुसरत फतेह अली खान को लताड़ लगा दी। कहा सूफी गाना बहुत शालीनता और तन्मयता के साथ गया जाता हैं लेकिन ये चिल्ला चिल्ला कर जोर जोर से गर्दन हिलाते हुए गाते हैं। समझ में नहीं आता ये सूफी गायक हैं या कव्वाली गा रहे हैं। इस इंटरव्यू के बाद इनको धीरे धीरे बॉलीवुड इंडस्ट्री से काम मिलना बंद हुआ बाद में पूरी तरह से बंद हो गया।
बॉलीवुड इंडस्ट्री शुरू से ही ऐसी रही हैं अपने देश के कलाकारों को कुछ भी अनाप शनाप बोलते रहिए।लेकिन पड़ोसी मुल्क के कलाकारों को लेकर सच भी बोल दोगे तो तुम्हारा करियर खत्म हो जाएगा। मोहम्मद अज़ीज़ एकमात्र उदाहरण नहीं है अभिजीत भी इसके जीते जागते उदाहरण हैं।















