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सीएम पद छोड़ राज्यसभा की ओर बढ़े नीतीश कुमार, बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत

-सीएम पद छोड़ राज्यसभा की ओर बढ़े नीतीश कुमार, बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत

पटना।दीपक। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक अध्याय जुड़ गया है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने ट्वीट कर यह संकेत दिया है कि अब वह बिहार की सक्रिय राजनीति से दूरी बना रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। माना जा रहा है कि अब वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा के सदस्य बनने जा रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि नीतीश कुमार पहली बार मार्च महीने में ही बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और अब मुख्यमंत्री पद छोड़ने का फैसला भी उन्होंने मार्च महीने में ही लिया है। इस घटनाक्रम के बाद पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हो गई है।
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार को ‘सुशासन बाबू’ के नाम से जाना जाता है। वहीं कई बार गठबंधन बदलने के कारण उन्हें विपक्ष द्वारा ‘पलटू मास्टर’ भी कहा जाता रहा है। हालांकि यह भी सच है कि पिछले करीब 25 वर्षों से बिहार की राजनीति उनके इर्द-गिर्द ही घूमती रही है।
नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को भाजपा के समर्थन से बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन उस समय उनके पास विधानसभा में बहुमत नहीं था और उन्हें मात्र सात दिनों बाद 10 मार्च 2000 को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद 24 नवंबर 2005 को एनडीए की जीत के बाद उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और राज्य में सड़क, शिक्षा, कानून व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में कई फैसले लेकर अपनी विकासवादी छवि को मजबूत किया।


2010 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के बाद उन्होंने 26 नवंबर 2010 को तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और पूरा कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद 2015 में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच उन्होंने 22 फरवरी 2015 को चौथी बार और महागठबंधन की जीत के बाद 20 नवंबर 2015 को पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

जुलाई 2017 में आरजेडी से मतभेद के बाद उन्होंने महागठबंधन से अलग होकर फिर से एनडीए का साथ लिया और 27 जुलाई 2017 को छठी बार मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद 16 नवंबर 2020 को उन्होंने सातवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
अगस्त 2022 में उन्होंने एनडीए से अलग होकर आरजेडी और कांग्रेस के साथ महागठबंधन सरकार बनाई और 10 अगस्त 2022 को आठवीं बार मुख्यमंत्री बने। फिर जनवरी 2024 में उन्होंने महागठबंधन छोड़कर एनडीए में वापसी की और 28 जनवरी 2024 को नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद 20 नवंबर 2025 को उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद संभाला।
करीब ढाई दशक से बिहार की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रहे नीतीश कुमार का यह लंबा राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति में एक अनोखा उदाहरण बन गया है। अब उनके राज्यसभा जाने के फैसले के साथ ही बिहार की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करती नजर आ रही है।