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सकरा : न टेकनिशि़यन न डाक्टर,चल रहा कई अलट्रासाउणड केन्द्र

-न टेकनिशि़यन न डाक्टर,चल रहा कई अलट्रासाउणड केन्द्र

◆ केंद्रों के बाहर भ्रूण जांच नहीं होने का लगा है बोर्ड
● मनमानी फीस वसूल कर कर रहे गरीबो का शोषण
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सम्वाददाता। मुजफ्फरपुर।

कहने को सकरा में रजिस्टर्ड अल्ट्रासाउंड का संचालन हो रहा है. जिसमें गरीबों की जांच हो रही है मनमाने रकम की वसूली भी होती है पर थोड़ी गौर करने वाली बात यह है कि हम लोगों ने कभी इस बात पर चिंतन नहीं किया कि अल्ट्रासाउंड का रिपोर्ट देने वाला कौन है ?आखिर वह चिकित्सक है. जिनके नाम से अल्ट्रासाउंड रजिस्टर्ड है या फिर तथाकथित टेक्नीशियन जिनके पास कोई डिग्री तक नहीं है मिडिल पास इंटर पास होने पर लैब टेक्नीशियन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं इतना ही नहीं उनके पीछे की सच्चाई यह है कि जांच रिपोर्ट पर की गई हस्ताक्षर भी सही नहीं होते । हैरत की बात यह है कि वे तमाम चिकित्सक जिनके नामों पर सकरा थाना क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड रजिस्टर्ड है उनके नाम से कई जगहों पर पहले से ही अल्ट्रासाउंड चल रहा है . बावजूद इसके प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर नीम हकीम के द्वारा अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है जिससे गरीबों की जान खतरे में पड़ गई है ।बाजी बुजुर्ग पंचायत की सुनीता किडनी कांड तथा बहादुरपुर गांव की पिंकी की गर्भाशय का ऑपरेशन गलत अल्ट्रासाउंड जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का नमुना है ।

आइए जानते हैं इससे संबंधित कुछ तथ्य
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अल्ट्रासाउंड अवैध रूप से ग्रामीण इलाके में या फिर नर्सिंग होम में संचालित हो रहा है. सकरा में संचालित कई अल्ट्रासाउंड केंद्र झोलाछाप के भरोसे संचालित हो रहा है. रेडियोलॉजिस्ट के नाम पर उनके द्वारा ही केंद्रों का संचालन होता है तथा मरीजों की जांच होती है. ऐसे में कई बार जांच रिपोर्ट भी गलत रहती है. जब मरीज द्वारा दोबारा किसी अन्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड कराया जाता है और रिपोर्ट में भिन्नता मिलती है तब इसका खुलासा होता है कि रेडियोलॉजिस्ट के बजाय झोलाछाप द्वारा मरीज की जांच कर रिपोर्ट बना दी गयी है ।

केंद्रों के बाहर भ्रूण जांच नहीं होने का लगा है बोर्ड:
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थाना क्षेत्र में में संचालित अधिकांश अल्ट्रासाउंड केंद्रों के बाहर भ्रूण जांच नहीं होने से संबंधित बोर्ड लगा है. जब भी कोई जांच टीम आती है तो यह बोर्ड देखकर खुश होती है कि यहां भ्रूण जांच नहीं होता है, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है. अधिक पैसा कमाने के लालच में केंद्र संचालक द्वारा चोरी-छिपे भ्रूण जांच भी की जाती है. हालांकि ऐसे मरीजों का कोई रेकाॅर्ड नहीं रखा जाता और न ही ऐसे मरीजों को जांच रिपोर्ट ही उपलब्ध करायी जाता है. इस तरह से भ्रूण लिंग जांच का भी धंधा फल फुल रहा है।

अल्ट्रासाउंड सेंटर पर उपलब्ध नहीं रहती रेटचार्ट
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अल्ट्रासाउंड के लिए सबसे जरूरी रेट चार्ट होती है जो किसी भी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर उपलब्ध नहीं रहती है झोलाछाप दलालों की मदद से मुंह मांगी रकम वसूल करते हैं ।

अल्ट्रासाउंड सेंटर्स संचालित करने के लिए क्या हैं जरूरी
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इस संबंध में हेल्थ डिपार्टमेंट द्वारा कड़े निर्देश दिए गए हैं।बताया गया कि अल्ट्रासाउंड सेंटर्स में जांच करने के लिए एक्सपीरिएंश्ड गाइनिकोलॉजिस्ट के साथ-साथ रेडियोलॉजिस्ट के पास एमडी डिग्री होना जरूरी है। वहीं, एमबीबीएस डॉक्टर्स के लिए सोनोग्राफी या इमेज स्कैनिंग की छह महीने की ट्रेनिंग जरूरी है ।परंतु धरातल की जो स्थिति है वह भगवान भरोसे है ।

जांच नहीं होने से फल फूल रहा है धंधा
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अल्ट्रासाउंड सेंटर्स की जांच सम्बंधित विभाग के अधिकारियों के द्वारा कभी नहीं की जाती है जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में धंधा फल फूल रहा है।जब कभी भी जांच होने की बात आती है तो सम्बंधित लोग अपनी अपनी दुकानें बंद कर देते हैं ।जांच प्रक्रिया खत्म होते ही पून:दुकाने खुलने लगती है ।

कहते हैं चिकित्सा पदाधिकारी
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चिकित्सा पदाधिकारी डा० मशीहउद्दीन ने कहां की सकरा में अल्ट्रासाउंड केंद्र की जांच कि गयी है ।ग्यारह अल्ट्रासाउंड केंद्र को बंद कराया गया था लेकिन धीरे-धीरे वैसे केन्द्र खुलने लगे हैं। विभाग के द्वारा कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं है ।

कहते हैं समाजसेवी प्रवीण कुमार
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समाजसेवी प्रवीण कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण चिकित्सा क्षेत्र में अवैध नर्सिंग होम एवं अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हो रहे हैं । प्रशासन यदि सख्त होती तो अवैध रूप से केन्द्रो का संचालन नहीं होता ।उनका कहना है कि वे इस तरह के अवैध धंधा के खिलाफ है ।जिला में बेहतर चिकित्सा की व्यवस्था हो ताकि गरीबों की जान सुरक्षित रह सके ।