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राजापाकर में चैती छठ की आस्था चरम पर, अस्ताचलगामी सूर्य को दिया गया अर्घ्य

–राजापाकर में चैती छठ की आस्था चरम पर, अस्ताचलगामी सूर्य को दिया गया अर्घ्य

राजापाकर। संजय श्रीवास्तव। चैती छठ महापर्व के अवसर पर राजापाकर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों सहित आसपास के इलाकों में गहरी आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। पर्व के तीसरे दिन छठव्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को पारंपरिक विधि-विधान के साथ अर्घ्य अर्पित किया।
छठव्रती महिलाओं ने फल, फूल और नैवेद्य से भगवान भास्कर की पूजा करते हुए अखंड सौभाग्य, परिवार में सुख-शांति, उन्नति और समृद्धि की कामना की। घाटों पर भक्तिमय माहौल के बीच श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण छठ गीतों से गूंज उठा।
यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक है, जिसमें सूर्य देव और जल (नदी, तालाब) की पूजा की जाती है। पूजा में बांस के सूप, मिट्टी के चूल्हे और मौसमी फलों का उपयोग किया जाता है, जिससे यह पर्व पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल बनता है।


छठ व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, जिसमें व्रती 36 घंटे तक निर्जला रहकर सूर्य उपासना करते हैं। यह पर्व संयम, शुद्धता और अटूट आस्था का प्रतीक है। छठ पूजा की विशेषता यह भी है कि इसमें पहले डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और उसके बाद उगते सूर्य को, जो जीवन में हर अवस्था के सम्मान का संदेश देता है।
इस पूजा में किसी पुरोहित की आवश्यकता नहीं होती, व्रती स्वयं ही पूजा संपन्न करते हैं। साथ ही, पूरे समाज द्वारा सामूहिक रूप से घाटों की सफाई और आयोजन में सहयोग किया जाता है, जो सामाजिक एकता और समर्पण की मिसाल पेश करता है।