-राजापाकर में करोड़ों की जलमीनार बनी शोपीस, 10 साल बाद भी नहीं मिल रहा पानी
राजापाकर (वैशाली)। संजय श्रीवास्तव।
प्रखंड मुख्यालय के राजापाकर बाजार स्थित शनिचर हाट चौक पर लाखों रुपये की लागत से बना जलमीनार आज भी लोगों के लिए महज शोभा की वस्तु बना हुआ है। पीएचडी विभाग की लापरवाही और मनमानी के कारण क्षेत्र के लोगों को समय पर पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 10 वर्ष पूर्व करीब एक करोड़ रुपये की लागत से इस जलमीनार का निर्माण सौर ऊर्जा से संचालित करने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन सौर प्लेट के माध्यम से यह व्यवस्था कभी सुचारू रूप से काम नहीं कर सकी, जिसके चलते लोगों को एक बूंद पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। कभी-कभार जलमीनार चालू भी किया जाता है तो पानी का दबाव इतना कम रहता है कि लोगों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।
ग्रामीण गजेंद्र कुमार ने बताया कि पंचायत योजना के तहत सड़क किनारे नाला निर्माण के दौरान जलापूर्ति के पाइप जगह-जगह कट और क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे स्थिति और भी खराब हो गई है। पाइपलाइन टूटने के कारण कई बार मशीन चालू होने पर लोगों के घरों के सामने पानी भर जाता है, लेकिन नियमित आपूर्ति नहीं हो पाती।

पीएचडी विभाग द्वारा आज तक इन पाइपों की मरम्मत नहीं कराई गई है।
प्रखंड प्रमुख ललिता देवी ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार विभाग के उच्च अधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। जलमीनार पास में होने के बावजूद लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
वहीं, पीएचडी विभाग की कनीय अभियंता अनामिका ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और जलमीनार को बिजली से संचालित करने के लिए एस्टीमेट बनाकर विभाग को भेज दिया गया है। इसमें 16 एचपी का मोटर और एक विशेष ट्रांसफार्मर लगाने का प्रस्ताव है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा और लोगों को पानी मिलने लगेगा।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों, जिनमें पूर्व विधायक प्रतिनिधि राजीव रंजन उर्फ पंकज यादव, समाजसेवी नथुनी प्रसाद सिंह, पंसस तपसी प्रसाद सिंह, जयपत प्रसाद सिंह, अरविंद सिंह, रंजन कुमार और महेश प्रसाद सिंह शामिल हैं, ने पीएचडी विभाग से जल्द से जल्द जलमीनार को विद्युत कनेक्शन देकर चालू करने की मांग की है, ताकि वैशाख की भीषण गर्मी में लोगों को पेयजल संकट से राहत मिल सके।









